साहिबाबाद। आवास विकास की सिद्धार्थ विहार योजना में पर्यावरण बहाली के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में 50 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे। सिद्धार्थ विहार में एसटीपी प्लांट, ग्रीन बेल्ट एवं सड़कों को विकसित न किए जाने पर शिकायतकर्ता संजीव कुमार की शिकायत पर एनजीटी ने यह फैसला सुनाया है। तीन मई को एनजीटी में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई थी जिसका आदेश बृहस्पतिवार को साइट पर अपलोड किया गया।
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता चेतन जादौन का कहना है कि पर्यावरण बहाली के लिए जो 50 करोड़ रुपये यूपीपीसीबी में जमा कराए जाने हैं उनमें से 20 करोड़ की राशि आवास विकास एवं इसके अलावा 30 करोड़ की राशि प्रतीक, गौड़ सिद्धार्थम एवं एपेक्स बिल्डर को जमा कराना होगा। इस राशि का प्रयोग यूपीपीसीबी की ओर से सिद्धार्थ विहार योजना में लोगों को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने पर किसा जाएगा। अधिवक्ता चेतन जादौन का कहना है कि आवास विकास की इस योजना के तहत लंबे समय से कई कार्य अटके हुए हैं। सिद्धार्थ विहार में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण अब तक अधूरा पड़ा है, हरियाली के लिए काम नहीं किया गया। वहीं, यहां एक थीम पार्क बनाया जाना था उस पर भी काम शुरू नहीं हुआ जिसकी वजह से यहां रहने वाले लोग परेशान हैं। इन्हीं परेशानियों को लेकर पूर्व में शिकायत के बाद एनजीटी ने प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम गठित की थी जिसने अपनी रिपोर्ट एनजीटी में जमा की। अधिवक्ता का कहना है कि प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद ही सुनवाई में एनजीटी ने यह आदेश किए हैं। वहीं दूसरी ओर इस मामले में आवास विकास के अधीक्षण अभियंता राकेश चंद्रा का कहना है कि उनके पास एनजीटी का ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। वहीं यूपीपीसीबी का क्षेत्रीय प्रबंधक उत्सव शर्मा ने भी ऐसे किसी आदेश की कॉपी मिलने से इनकार किया है।