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Ghaziabad News: आयकर विभाग के रडार पर जिले के 300 बैनामेदार

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गाजियाबाद। आयकर विभाग के रडार पर जिले के 300 बैनामेदार आ गए है। इन सबने 30 लाख से अधिक की संपत्ति की खरीद-फरोख्त की है और इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) नहीं भरा है। ई-वेरिफकेशन के बाद मामले का खुलासा होने पर आयकर विभाग ने सब रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर डीड की कॉपी मांगी है।
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2020-21 में जिले के 300 लोगों ने संपत्ति की खरीद-फरोख्त की थी लेकिन आईटीआर दाखिल नहीं किया। ये सभी संपत्तियां 30 लाख के ऊपर की हैं। बैनामे की रिपोर्ट दिल्ली स्थित आयकर मुख्यालय को भेजी गई थी। आयकर विभाग की जांच में मामले का खुलासा होने पर बैनामेदार को नोटिस भेजकर आईटीआर दाखिल करने और आय के स्रोत की जानकारी देने के लिए कहा गया। साथ ही निर्देश दिए गए कि वह कर के साथ लगने वाले 25 फीसदी अतिरिक्त ब्याज को जमा करें। आयकर अधिकारी का कहना है कि बैनामेदारों को तीन नोटिस दी जा चुकी है। इसके बाद भी आईटीआर दाखिल नहीं किया गया है। अब इनकम टैक्स के साथ 50 फीसदी अतिरिक्त ब्याज जमा करना होगा। जिले में लोनी, मुरादनगर, मोदीनगर, विजयनगर, साहिबाबाद में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की गई है।

150 लोगों ने 10 लाख से अधिक की एफडी, आय का स्रोत नहीं दर्शाया

बैंकों और पोस्ट ऑफिस में 150 खाताधारक ऐसे मिले हैं जिन्होंने 10 लाख रुपये से अधिक का फिक्स डिपाॅजिट किया लेकिन आईटीआर दाखिल नहीं की। 50 लोग ऐसे मिले हैं जिन्होंने फिक्स डिपाॅजिट पर मिलने वाले ब्याज को नहीं दर्शाया है। इन लोगों को भी आयकर विभाग ने नोटिस भेजा है। आयकर अधिकारियों का कहना है कि दो साल से अधिक का समय बीत चुका है अब इनको 50 फीसदी अतिरिक्त ब्याज के साथ टैक्स जमा करना होगा। बैंक और पोस्ट ऑफिस से रिकार्ड तलब किया गया है।
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150 लग्जरी वाहन स्वामी भी रडार पर
आयकर विभाग की जांच में गाजियाबाद 150 लोग ऐसे मिले हैं जिन्होंने दो साल पहले 10 लाख से ऊपर के लग्जरी वाहन खरीदें लेकिन आयकर रिटर्न नहीं भरा। ई-वेरिफिकेशन के दौरान पैनकार्ड और आधार कार्ड की जांच से मामला पकड़ में आया। जिले में वाहन बेचने वाले शोरूमों से रिकार्ड तलब किया गया है।

आईटीआर जमा नहीं करने पर संपत्ति होगी कुर्क
10 लाख की संपत्ति की खरीदफरोख्त करने वाले लोगों को आय का स्रोत आयकर विभाग को बताना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग तीन बार नोटिस देकर आईटीआर दाखिल करने का मौका देता है। एक साल बाद 25 फीसदी और दूसरे साल से 50 फीसदी अतिरिक्त ब्याज के साथ आईटीआर दाखिल करने का मौका दिया जाता है। इसके बाद आयकर विभाग स्क्रूटनी के लिए फाइल भेज देता है। यह सभी प्रक्रिया फेसलेस होती है। इनकम टैक्स अधिवक्ता जावेद खान सैफ का कहना है कि जब उपभोक्ता सालों साल आईटीआर दाखिल नहीं करता है और आय के स्रोत की जानकारी छिपाता है तो संपत्ति कुर्क कर ब्याज के साथ टैक्स की वसूली का प्रावधान है।
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