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Ghaziabad News: पॉलिटेक्निक में प्रवेश परीक्षा के लिए आए 2.62 लाख आवेदन

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गाजियाबाद। पॉलिटेक्निक की प्रवेश परीक्षा के लिए इस बार पिछले साल से कम आवेदन हुए हैं। 29 फरवरी के बाद चार दिन आवेदन की तारीख बढ़ाने के बावजूद भी ज्यादा कुछ नहीं हो सका और करीब 2.62 लाख आवेदन ही आ सके जबकि पिछले साल 3.80 लाख छात्रों ने प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किए थे और 2.72 लाख छात्रों ने इसकी परीक्षा दी थी। इसी वजह से निजी कॉलेजों में 80 फीसदी सीटें खाली रह गई थीं।
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प्रदेश में सरकारी और गैर-सरकारी कॉलेजों में पाॅलिटेक्निक की करीब 1.40 लाख सीटें हैं। इसमें सरकारी कॉलेजों में 49788 और निजी कॉलेजों में 89916 सीटें हैं। इसमें बीते साल 87359 सीटें खाली रह गई थीं। इसी वजह से कई निजी पॉलिटेक्निक कॉलेज बंदी की कगार पर पहुंच गए। इस बार आवेदनों की संख्या घटने से निजी कॉलेज प्रबंधन की चिंता फिर से बढ़ रही है। आने वाली 16 मार्च को प्रवेश परीक्षा होगी और चार मार्च को आवेदन के लिए पोर्टल भी बंद कर दिया गया है।
देवोमहेश पाॅलिटेक्निक के निदेशक मनीष सिंह ने बताया कि निश्चित ही इस बार भी प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्रों की उपस्थिति 70 फीसद से कम रहने वाली है। इस बारे में राजकीय पॉलिटेक्निक काॅलेज गाजियाबाद के प्रधानाचार्य डॉ. जानबेग लोनी ने बताया कि आवेदन के लिए छात्रों को दो बार मौका दिया गया। आवेदन के लिए और समय देने पर सत्र भी देरी से शुरू होता है, जिससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होता है।
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इस बार मात्र 56 दिन के लिए खुला पोर्टल :
हाइटेक पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य अमन श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले साल प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने को जेईईसीयूपी का पोर्टल 100 दिन से ज्यादा सक्रिय रहा। इस बार ऐसे समय पर पोर्टल खोला गया, जब बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं और मात्र 56 दिन में पोर्टल को बंद भी कर दिया गया। ऐसे में प्रदेशभर के सभी कॉलेजों मेें कैसे सीटें भर पाएंगी, इसकी किसी को चिंता नहीं है।
पिछले साल लागू हुआ काउंसिलिंग से दाखिले का नियम :
सत्र 2023-24 से पहले निजी कॉलेजों में पॉलिटेक्निक में बिना प्रवेश परीक्षा दिए भी दाखिले हो जाते थे। इसी वजह से जो बच्चे प्रवेश परीक्षा देकर आते थे, उनके दाखिले के बाद शेष सीटों को कॉलेज सीधे भर लेते थे लेकिन 2023-2024 में प्राविधिक शिक्षा विभाग ने काउंसिलिंग से ही 100 फीसदी छात्रों का दाखिला होने का नियम लागू कर दिया। इससे कॉलेजों में सीटें खाली रह गईं। इस बार राजकीय कॉलेजों को प्राविधिक शिक्षा विभाग ने प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने और काउंसिलिंग से दाखिले होने की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश का धरातल पर कोई असर नहीं दिखा और आवेदन की संख्या पिछले साल की अपेक्षा बढ़ने की बजाय और घट गई।
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