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Ghaziabad News: 250 मेगावाट घटी बिजली की मांग, फिर भी कटौती है जारी

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गाजियाबाद। बारिश होने के बाद जिले में 250 मेगावाट बिजली की मांग कम हो गई है। इस समय जिले में 1550 मेगावाट बिजली की मांग है, जबकि एक सप्ताह पहले तक यह 1800 मेगावाट थी। विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस समय मांग और खपत बराबर है। वहीं, दूसरी ओर खपत कम होने के बाद भी रोजाना औसतन तीन से चार घंटे की कटौैती अलग-अलग क्षेत्रों में हो रही है।
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ट्रांसमिशन के एसई रामानंद ने बताया कि इस बार गर्मी बढ़ने के बाद बिजली की मांग भी 1400 मेगावाट से बढ़कर 1800 तक पहुंच गई थी। अब बारिश होने के बाद बिजली की मांग में कमी आई है। जिले को पर्याप्त बिजली मिल रही है। वहीं, बिजली की मांग कम होने के बावजूद तीन से पांच घंटे बिजली गुल हो रही है। बताया जा रहा है कि फाॅल्ट और तार टूटने के कारण बिजली की आपूर्ति में रुकावट आ रही है। इसके अलावा कुछ ट्रांसफार्मरों पर लोड बढ़ने से भी ट्रिपिंग की समस्या आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि एक साल से बिजलीघर और ट्रांसफार्मरों का लोड बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
इससे अब बिजली आपूर्ति में काफी सुधार है। देहात क्षेत्र के पांच और शहरी क्षेत्र के तीन बिजलीघर ओवरलोड हुए थे। उनकी क्षमता बढ़ा दी गई है। फिलहाल कोई बिजलीघर ओवरलोड नहीं है। कुछ क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर ओवरलोड हैं। देहात के इलाकों में ट्रांसफार्मरों के ओवरलोड होने की समस्या ज्यादा है। जबकि शहरी क्षेत्र में अधिकांश ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा चुकी है। ट्रांसफार्मर के एक बार ओवरलोड होने पर उसमें मौजूद तेल को ठंडा होने में दो से तीन घंटे का समय लगता है। इस समय आपूर्ति कम होने से इस समस्या में कमी आई है।
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तीन से चार घंटे की अघोषित कटौती
सोमवार को शहरी क्षेत्र के कई इलाकों में बार-बार ट्रिपिंग होने से लोग परेशान रहे। दिल्ली गेट, नंदग्राम, कैलाभट्ठा, विजयनगर, गोविंदपुरम, कविनगर, शास्त्रीनगर, बहरामपुर, लाल कुआं, आकाशनगर, बसंत कुंज, पटेलनगर, लोहियानगर समेत शहर की 40 से ज्यादा कॉलोनियों में सोमवार को तीन से चार घंटे की अघोषित कटौती हुई।

बाढ़ से कई ग्रिड हुए प्रभावित
ऊर्जा निगम के एक अधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ आने से कई ग्रिड पर बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। उत्तर प्रदेश के हरदुआगंज और ओबरा पावर प्लांट में उत्पादन ठप हो गया है। उत्पादन कम होने से सप्लाई प्रभावित हो सकती है लेकिन अभी तक जिला इस प्रभाव से मुक्त है।
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