गाजियाबाद। पहले ड्राइवर की नौकरी की फिर अपनी बस बनाई, घाटा हुआ तो हरिद्वार में तीन साल तक सत्संग आश्रम में रहने लगा। इसके बाद भी महज 10वीं पास युवक पांच जोड़ी वर्दी सिलवाकर दिल्ली पुलिस का दरोगा बन गया। फर्जी दरोगा बन वह लोनी और ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने की एवज में वसूली करने लगा। गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने बृहस्पतिवार को उसे गिरफतार कर लिया। उसके पास से पांच जोड़ी वर्दी, इन पर लगाए जाने वाले स्टार और फर्जी परिचय पत्र बरामद हुए हैं। क्राइम ब्रांच के निरीक्षक ने अब्दुरर्हमान सिद्दीकी ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एसीपी क्राइम ब्रांच अजित कुमार रजक ने बताया कि फर्जी दरोगा बनकर वसूली करने वाला योगेश शर्मा (49) सिर्फ 10वीं पास है। मूलरूप से शामली जिले के भूरा कंडेला का रहने वाला योगेश फिलहाल बागपत जिले में खेकड़ा तहसील के गांव गोठरा में रह रहा है। पढ़ाई के बाद उसने ड्राईविंग सीखी और दिल्ली में प्राईवेट बस चलाने लगा था। प्राइवेट बसों का संचालन बंद हो जाने पर रुपये उधार लेकर अपनी बस खरीद ली। इसमें काफी घाटा हो जाने पर उधार ली गई रकम को नहीं चुका सका और हरिद्वार भाग गया। यहां तीन साल तक सतसंग आश्रम में रहा। तीन वर्ष बाद लौटकर इंदिरापुरम में बस पर ड्राइवर की नौकरी करने लगा। एसीपी ने बताया कि इसकी गलत आदतों की वजह से पत्नी ने भी उसे छोड़ दिया। इसके बाद वह खेकड़ा के गांव गोठरा में जाकर रहने लगा।
यहां इसे रुपये कमाने का आईडिया सूझा और उसने दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर की पांच वर्दी बनवा लीं। गांव के लोगों को उसने बताया कि वह दिल्ली पुलिस में दरोगा है। वह घर से वर्दी पहनकर बाइक पर निकलता था और लोनी, ट्रॉनिका सिटी, लोनी बॉर्डर व इन से सटे दिल्ली के आसपास के थानों मे अपने एक साथी के साथ मिलकर विवादित संपत्तियों के मामलों की जानकारी करता था। इसके बाद दोनों पक्षों को डरा धमकाकर निपटारा करने लगा। इसकी एवज में वह अवैध वसूली करता था। करीब तीन साल से वह यही काम कर रहा था। कभी-कभी सादे कपड़ों में जाकर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी भी बता देता था। क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी बनकर वह पूर्व में धोखाधडी कर चुका है। मार्च 2021 में उसे लोनी थाने से जेल भेजा गया था। एसीपी ने बताया कि उसके खिलाफ गाजियाबाद में दो केस दर्ज हैं।
अच्छे डील-डौल का फायदा उठाकर करने लगा वसूली
पुलिस के मुताबिक योगेश का डील-डौल अच्छा है। इसी का फायदा उठाकर उसने फर्जी दरोगा बनने का फैसला किया। उसने दिल्ली पुलिस का फर्जी परिचय पत्र भी बनवा लिया था। जरूरत पड़ने पर वह उसे दिखाकर न सिर्फ विवादित संपत्तियों के मालिकों पर रौब झाड़ता था, बल्कि कभी मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को भी दिखाकर दबाव बनाता था।