साहिबाबाद। नोएडा में 15 हजार करोड़ की कर चोरी के मामले में जांच दो कदम आगे बढ़ते ही एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गाजियाबाद शहर में ऐसी 15 बोगस फर्मों का पता चला है, जो 100 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट ( आईटीसी ) यानी जीएसटी रिफंड वसूल चुकी हैं। इन फर्मों के जरिये दिखाई गई बिलिंग पर शक होने पर फाइलें खंगाली गईं। जिन लोगों के नाम फर्म पंजीकृत थीं, उन्हें बुलाकर पूछताछ की गई तो पता चला कि कोई माली है, कोई चौकीदार और कोई सुरक्षा कंपनी का गार्ड। हिरासत में लिए जाने पर उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है कि उनके नाम से फर्म चल रही हैं।
इन बोगस फर्मों का पता डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की गाजियाबाद क्षेत्रीय इकाई ने लगाया। सभी बोगस फर्में दुग्ध उत्पाद से जुड़ी हैं। दूध, घी, मक्खन, छाछ, मिल्क पाउडर की बिक्री पर आईटीसी वसूला गया। नोएडा में बोगस कंपनियों का खुलासा होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। संदेह के घेरे में आई फर्मों के रिकार्ड खंगाले गए। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 30 फर्मों पर छापे मारे गए। इनमें 125 करोड़ की कर चोरी मिली। हरियाणा के मेवात और सहारनपुर में बोगस फर्म के जरिये 80 करोड़ की कर चोरी के आरोप में दिल्ली से कारोबारी संजय ढींगरा को गिरफ्तार किया गया।
इसी क्रम में गाजियाबाद में संदिग्ध लग रहीं फर्मों के मालिकों से पूछताछ की गई। इसमें पता चला कि माली, चौकीदार, गार्ड के दस्तावेज पर फर्म पंजीकरण कराया गया और आईटीसी की वसूली की गई। फर्में अब तक जीएसटी विभाग को 100 करोड़ का चूना लगा चुकी हैं। इन फर्मों के बिलों की जांच से हापुड़ की भी 10 से ज्यादा फर्म शक के घेरे में आ गई हैं। जीएसटी के बड़े अधिकारी ने बताया कि जांच अभी चल रही है। बोगस फर्मों का जाल व्यापक रूप में फैला हुआ है। इसके पीछे कई गिरोह काम कर रहे हैं। जल्द ही कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
125
करोड़ की कर चोरी पकड़ी जा चुकी है दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी में ।
10
से ज्यादा फर्म शक के घेरे में आईं हापुड़ की, खंगाली जा रही है इनकी फाइल।
15
हजार करोड़ की कर चोरी पकड़ी गई थी नोएडा में, उसी केस में चल रही है जांच।
ऐसे चल रही जालसाजी
दूसरों के दस्तावेज पर जालसाज बोगस फर्म पंजीकरण करा लेते हैं। बोगस फर्मों से आपस में कारोबार कर फर्जी बिल बनाए जाते हैं। उत्पाद की फर्जी बिक्री पर जीएसटी की अदायगी दिखाई जाती है। मान लो, 1000 रुपये जीएसटी दिखाया गया। अब उस उत्पाद को बनाने पर 800 रुपये जीएसटी पहले ही दिया जा चुका है। ऐसे में जालसाज 200 रुपये रिफंड के लिए क्लेम करते हैं यानी टैक्स दिया कुछ नहीं और वसूली कर ली 200 रुपये की।