अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के दंगों के एक मामले में चार आरोपियों को बुधवार को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि दो पुलिसकर्मियों की गवाही पर भरोसा करना खतरनाक होगा, क्योंकि उनकी कहानी जांच रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से मेल नहीं खाती। एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने करावल नगर में एक ऑटो-रिक्शा जलाने और एक दुकान को तोड़कर आग लगाने के मामले में सुमित कुमार, अनुज, राहुल और सचिन को आरोपमुक्त कर दिया। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा दोनों पुलिस अधिकारी विश्वसनीय गवाह नहीं हैं। उनकी गवाही पर भरोसा करके आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाना खतरनाक होगा। इसलिए, अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दोनों पुलिस गवाहों की कहानी जांच रिकॉर्ड और उपलब्ध अन्य सबूतों से पूरी तरह विरोधाभासी पाई गई। यह मामला फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान करावल नगर इलाके में एक ऑटो-रिक्शा जलाने और एक दुकान को नुकसान पहुंचाकर आग लगाने से जुड़ा था।