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NIRF Ranking: IIT के पूर्व डायरेक्टर ने एनआईआरएफ रैंकिंग में बदलाव को लेकर केंद्र को लिखा पत्र, छह बिंदुओं में रखी बदलाव की मांग

Tue, 19 Jul 2022 06:23 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल के बजाय दो साल के अंतराल पर एनआईआरएफ रैंकिंग जारी होनी चाहिए। हर साल संस्थानों में बदलाव नहीं हो सकते हैं।
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एनआईआरएफ रैंकिंग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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आईआईटी दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल राव ने केंद्र सरकार द्वारा जारी की जाने वाली एनआईआरएफ रैंकिंग में बदलाव को लेकर पत्र लिखा है। प्रो. राव ने छह बिंदुओं पर भारत सरकार से छह बिंदुओं पर एनआईआरएफ रैंकिंग में बदलाव की मांग रखी है। उनका कहना है कि एनआईआरएफ रैंकिंग में बदलाव जरूरी है। इसे भारत से बाहर इंटरनेशनल रैंकिंग का हिस्सा बनाना होगा।

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इसके लिए एनआईआरएफ रैंकिंग में विस्तार किया जाए या फिर एनआईआरएफ इंटरनेशनल रैंकिंग शुरू की जाए। इसमें दुनिया के टॉप 50 संस्थानों के साथ भारत के टॉप 50 संस्थानों को भी शामिल किया जाए।  पूर्व डायरेक्टर प्रो. राव ने कहा है कि समय आ गया है कि कुछ नए बदलाव के साथ भारत से निकलकर इंटरनेशनल स्तर को टारगेट किया जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो हम यही पर सिमटकर रह जाएंगे। एनआईआरएफ रैंकिंग में बदलाव बेहद जरूरी है। इंटरनेशनल स्तर पर जाने के लिए कुछ नए पैरामीटर सेट करने होंगे। फैकल्टी स्टूडेंट छात्र संख्या, रिसर्च, बजट, शिक्षा का खर्चा, रिसर्च पब्लिकेशन, रिसर्च इंपेक्ट, पेटेंट आदि पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल के बजाय दो साल के अंतराल पर एनआईआरएफ रैंकिंग जारी होनी चाहिए। हर साल संस्थानों में बदलाव नहीं हो सकते हैं। इस अवधि में डाटा एकत्रित करने पर काम करना चाहिए। अक्सर संस्थानों से ही डाटा पर सवाल उठते हैं, जोकि नहीं उठने चाहिए। यदि हर साल रैंकिंग जारी होगी तो एक ही तरह के संस्थान आगे बढ़ेंगे और दूसरे पिछड़ते जाएंगे। एक जैसा स्कोर हासिल करने वाले संस्थानों को एक समान रैंक मिलनी चाहिए।
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रैंकिंग जारी करने का मतलब संस्थानों को आगे बढ़ने पर फोकस होना चाहिए, न कि सिर्फ रैंकिंग में रैंक हासिल करने पर। इसके अलावा यदि किसी आईआईटी और एनआईटी  लगातार तीन साल तक टॉप 10 में शामिल रहता है तो फिर उसे स्वायत्त संस्थान का दर्जा मिल जाना चाहिए। रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को छोटे कम प्रदर्शन कर पाने वाले संस्थानों को आगे बढ़ाने में खासकर रिसर्च में सहयोग देना चाहिए। इससे रिसर्च समेत शिक्षा की  गुणवत्ता में बदलाव आएगा।

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