दिल्ली में जर्जर इमारतों को लेकर लगातार सामने आ रहे हादसों के बावजूद सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार लापरवाही बने हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल के स्टाफ क्वार्टर में पीजी छात्र और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर जर्जर हालत भवन में रहने को मजबूर हैं।
उनका आरोप है कि सफदरजंग अस्पताल का पीजी हॉस्टल दो साल पहले असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद वहां रहने वाले पोस्टग्रेजुएट छात्रों और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को इन स्टाफ क्वार्टर में शिफ्ट किया गया। उन्होंने दावा किया कि इन क्वार्टरों में दीवारों पर जगह-जगह सीलन, पानी के दाग, उखड़ा हुआ प्लास्टर, क्षतिग्रस्त हिस्से और छत से पानी तक टपकता है। यहां तक कि में कमरे की दीवारों की हालत बिल्कुल जर्जर है।
इन क्वार्टरों के लिए पीजी छात्रों व डॉक्टरों से करीब 18 से 22 हजार रुपये प्रतिमाह किराया लिया जा रहा है। ऐसे में डॉक्टरों का सवाल है कि जब उनसे इतना किराया लिया जा रहा है तो उन्हें सुरक्षित और रहने योग्य आवास क्यों नहीं दिया जा रहा। बताया जा रहा है कि जिस हॉस्टल को असुरक्षित कहकर खाली कराया गया वहां अभी भी परिसर में कैंटीन और मेस का संचालन जारी है। ऐसे में वहां रहने और आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हादसे से डरे छात्र और डॉक्टर
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच डॉक्टरों और छात्रों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को इन क्वार्टरों का तत्काल निरीक्षण कराना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित आवास की व्यवस्था करनी चाहिए। डॉक्टरों की मांग है कि अस्पताल प्रशासन, दिल्ली सरकार और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां मामले का संज्ञान लेकर भवन की संरचनात्मक जांच कराएं।