सैनिक फार्म में शनिवार को तेंदुआ दिखने के दूसरे दिन रविवार को भी लोग खौफजदा दिखे। सुबह से ही सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। साप्ताहिक अवकाश होने से लोग जरूरी कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकलते दिखे। शाम होते ही गलियों में कोई चहलकदमी नजर नहीं आई। सुरक्षा को देखते हुए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) व स्थानीय लोगों ने खुद इलाके की रात भर पहरेदारी की। लोगों ने इसके लिए सोशल मीडिया में सूचना के लिए समूह भी बनाया है। इसमें सब एक-दूसरे को तेंदुए को लेकर जानकारी साझा कर रहे हैं।
फाॅर्म के सबसे करीब नेब सराय और खानपुर का इलाका है। ऐसे में आरडब्ल्यूए के सदस्य लोगों को घर में रहने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, शाम को न तो गलियों में बच्चों का शोरगुल सुनने को मिला और न ही कोई चहलकदमी देखने को मिली। यहां तक की शाम की सैर पर जाने वाले लोग भी घरों में बंद रहे। यही नहीं घटना स्थल के पास कई झुग्गियां हैं। इनमें रहने वाले लोगों को पुलिस व वन्य विभाग के अधिकारियों ने शाम के बाद ही घर से निकलने पर रोक लगा दी है। इस वजह से स्थानीय लोगों को अंधेरे में ही खौफ में रात बितानी पड़ी। यहां रहने वाले लोग सहमे हुए हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही अड़चन
तेंदुआ जंगल से सटे जिस खाली प्लॉट में घुसा है, ठीक उसके पास ही शादी समारोह का आयोजन हो रहा है। ऐसे में वन विभाग की टीम को रेस्क्यू ऑपरेशन करने में परेशानी आ रही है। वन्य अधिकारियों का कहना है कि जिस तरफ यह समारोह हो रहा है, वहीं से केवल जंगल में जाने का रास्ता है। ऐसे में हो सकता है रोशनी अधिक होने की वजह से वह घबरा रहा हो। वहीं, शादी समारोह में कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए यहां के लोग सुरक्षा को चाकचौबंद किए हुए हैं। इसके लिए वह डंडे के सहारे सुरक्षा को पुख्ता कर रहे हैं।
नेब सराय इलाके में रहने वाले मोहित ने बताया कि उनका बेटा गुरुग्राम में कार्य करता है। जैसे ही तेंदुए की सूचना मिली, वैसे ही उन्होंने अपने बेटे को घर पर बुला लिया था। वह कहते हैं कि उनका बेटा देर रात काम से घर आता है। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, खानपुर में रहने वाली प्रियंका ने बताया कि वह रोजाना शाम की सैर पर जाती हैं। लेकिन, तेंदुए की दहशत इतनी है कि वह सैर पर नहीं गई। उन्होंने बताया कि बच्चों को भी पार्क में खेलने के लिए नहीं भेजा है। वह कहती हैं कि पता नहीं इसका खौफ कितने दिन तक बना रहेगा।
बारी-बारी से दे रहे ड्यूटी
लोगों ने मजबूरन खुद को अपने घरों में कैद कर लिया है। तेंदुए का डर का असर यह है कि स्थानीय लोग सुरक्षा को लेकर देर रात तक पहरा दे रहे हैं। यही नहीं, लोग रात में बारी-बारी से ड्यूटी दे रहे हैं। इसके लिए उन्होंने 10 लोगों की टीम बनाई है। प्रति दो घंटे के लिए इन्हें तैनात किया जा रहा है। इनके पास डंडे के साथ बाइक हेलमेट हैं। सैनिक फार्म में क्यूआरटी टीम के सदस्य सुरेश ने बताया कि वह देर रात से सोए नहीं हैं। पूरी रात उन्होेंने अपने साथियों के साथ पहरा दिया है।