नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने 2019 में अपनी सात साल की बेटी की हत्या करने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि यह बिना किसी उचित संदेह के स्थापित हो चुका है कि 23 अप्रैल, 2019 को विराज राय ने बच्ची का गला घोंटकर हत्या की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौम्या चौहान ने आदेश में कहा कि पीड़िता के छह साल के भाई की प्रत्यक्षदर्शी गवाही से साबित होता है कि बच्ची विराज के कब्जे में थी और वह उसे अस्पताल ले गया था। अदालत ने कहा कि जिन परिस्थितियों में बच्ची की मौत हुई, उन्हें स्पष्ट करने का दायित्व अभियुक्त पर था लेकिन उसने इन परिस्थितियों का खुलासा नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप उसके अपराध की बहुत प्रबल धारणा बन गई। अदालत ने कहा कि अपनी पत्नी को बच्चों से फोन पर बात न करने देना और उसके बाद फोन पर बार-बार उससे माफी मांगना भी अभियुक्त के आचरण के बारे में स्थिति बयान करता है। पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) रिपोर्ट में यह भी साबित किया गया कि वह बच्ची को अस्पताल लाया था और उसने अपनी बेटी की तार से गला घोंटकर हत्या करने की बात कबूल की थी। ब्यूरो