अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। दो महिलाओं ने जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) में नौकरी लगवाने के नाम पर एक व्यक्ति को 10 लाख रुपये की चपत लगाई। पीड़ित व्यक्ति एयर इंडिया में केबिन परिवेक्षक (सुपरवाइजर) के तौर पर नौकरी करते हैं। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी।
ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-82 निवासी सिद्धार्थ गुप्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह पांच साल से एयर इंडिया में केबिन सुपरवाइजर में कार्यरत है। वर्ष 2017 में नौकरी के दौरान सिद्धार्थ की मुलाकात सस्मिता सोरेन से हुई थी। उन्होंने सिद्धार्थ को 8 मार्च 2021 एसएमएस के माध्यम से डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन में नौकरी लगवाने की बात कही थी। इस दौरान उसने नौकरी लगवाने की एवज में रुपये की मांग की। इस पर सिद्धार्थ सहमत हो गए। सिद्धार्थ ने पहली बार 14 मार्च को सस्मिता के कहने पर 86 हजार रुपये उसकी बहन संयुक्ता सोरेन के फोन पे नंबर पर भेज दिए। जिनमें से उन्होंने चार हजार रुपये वापस कर दिए और कहा कि उन्हें फिलहाल 82 हजार रुपये की जरुरत थी। फिर धीरे-धीरे फार्म के लिए, कभी परीक्षा के नाम पर तो कभी इंटरव्यू के नाम पर रुपये लिए। पीड़ित का आरोप है कि 15 मार्च से 21 जुलाई 2021 तक दो बैंक अकाउंट नंबर पर 7,65,000 रुपये लिए गए। सस्मिता ने पूरा भरोसा दिया कि नौकरी दिसंबर 2021 या जनवरी 2022 तक लग जाएगी। 17 जून 2021 को उनके पास एक मेल आई , जिसमें बताया गया कि नौकरी लगाने का काम हो रहा है, लेकिन नौकरी नहीं मिली। वह दो माह तक इधर-उधर की बात करने लगी और बात करनी भी बंद कर दी। तब सिद्धार्थ ने अपने पिता दीपक गुप्ता को इस बारे में बताया। उन्होंने सस्मिता से बात करनी शुरू की, उसने दीपक गुप्ता से भी दो लाख रुपये ले लिए। यह बता कर रुपये लिए कि बहुत जल्द नौकरी मिल जाएगी। नौकरी न मिलने पर गुप्ता परिवार समझ गया कि उनके साथ धोखा किया जा रहा है। सामने आया कि सस्मिता डीजीसीए में कार्यरत नहीं हैं। सिद्धार्थ गुप्ता ने बताया कि सस्मिता सोरेन उड़ीसा में रहती है, जबकि उसकी बहन संयुक्ता सोरेन कोलकाता में रहती है और दोनों ने मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी की है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।