संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में डीसी शॉक मशीन नहीं है। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में पहुंचने वाले दिल के मरीजों को तुरंत प्रभाव से रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीजों की जान बचाने के लिए तीमारदारों को अन्य प्राइवेट अस्पतालों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
नियमों के तहत किसी भी बड़े अस्पताल में डीसी शॉक मशीन का होना अनिवार्य है। लेकिन जिले के सबसे बडे़ सरकारी अस्पताल जिला नागरिक अस्पताल में ही डीसी शॉक मशीन नहीं है। इस मशीन की कमी के कारण मरीजों को सही वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा। जिला नागरिक अस्पताल में दिल से जुड़ी समस्याओं को लेकर पहुंचने वाले मरीजों को सीपीआर देने के लिए मैन्यूअली भी कोई प्रयास नहीं किया जाता। ऐसे में इन मरीजों को सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है, लेकिन दूर होने के कारण कई बार मरीज की जान तक जाने का खतरा बना रहता है। ऐसी स्थिति में कई बार मजबूरन मरीज के तमीरदारों को प्राइवेट अस्पताल का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
धड़कन की गति को संतुलित करने का काम करती है डीसी शॉक मनीन
विशेषज्ञों की माने तो यदि किसी मरीज की दिल की धड़कन रुक जाती है और माॅनिटर पर सीधी लाइन दिखने लगती है तो इस मशीन के प्रयोग से दिल की धड़कन को रिवाइज किया जा सकता है। यदि समय रहते मरीज को यह शॉक नहीं मिले तो उसकी मौत होने की भी संभावना रहती है। इसके साथ ही सीपीआर के लिए इस मशीन का प्रयोग किया जाता है। जोकि यदि मैन्यूअली तरीके से दी जाए तो कम से कम 20 मिनट का वक्त लगता है।
इस संबंध में समाजसेवी सतीश चोपड़ा का कहना है कि डीसी शॉक मशीन का आपातकालीन विभाग मे होना अनिवार्य है। यह हार्ट को पुनः जागृत करने ( रिस्टार्ट ) करने में काम आती है। इसके बारे में हमने कई बार अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई है। लेकिन इसे अभी तक उपलब्ध नहीं करवाया गया है। इसकी वजह से डाॅक्टर मरीजों को रेफर कर पल्ला झाड लेते हैं। इस संबंध में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सविता यादव से जानकारी लेने के संबंध में फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।