फरीदाबाद। नगला गुजरान राजकीय माध्यमिक मॉडल संस्कृति स्कूल में 380 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक शिक्षिका की है। कक्षा छह से 8वीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 14 शिक्षकों की पद स्वीकृत है। इनमें से 13 पद पिछले अक्तूबर 2022 से रिक्त है। ऐसे में स्कूल के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है। खास बात यह है कि स्कूल की यह इकलौती शिक्षिका हैं, जिन्हें संस्कृत पढ़ाने के लिए रखा गया है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूल में शिक्षिका सभी विषय पढ़ाती हैंं।
वर्ष 2022 में राजकीय स्कूल को मॉडल संस्कृति स्कूल में तब्दील कर दिया गया था। इसके बावजूद विभाग की ओर से शिक्षकों की कमी को आजतक दूर नहीं की गई है। कक्षा छह से 8वीं कक्षा में 380 बच्चे हैं। नौ सेक्शन में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्शन में 40 से 45 बच्चे हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं नही है। इसके चलते सही तरीके से कक्षाएं नहीं लग पाती हैं।
ऐसी स्थिति में अक्सर दूसरे स्कूल से 5वीं कक्षा तक के शिक्षक को क्लास लेने के लिए बुलाया जाता है। नियमानुसार वह कक्षा छह के बच्चे को नहीं पढ़ा सकते है। स्कूल के प्रधानाचार्य अजय कुमार ने बताया कि शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों से कई बार संपर्क किया जा चुका है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता।
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मिड डे मिल की भी जिम्मेदारी
स्कूल में तैनात संस्कृत की शिक्षक पर मिड डे मिल बांटने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा प्रत्येक छात्रों का स्वास्थ्य रिकार्ड भी तैयार करना पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। ऐसे में छात्र क्लास से बंक मार देते है। स्कूल में अग्रेजी, गणित, ड्राइंग, शारीरिक शिक्षक, हिंदी, सामान्य ज्ञान व विज्ञान के शिक्षक का पद रिक्त है।
उच्च विद्यालय में भी शिक्षक का पद रिक्त
नौवीं से 12वीं कक्षा में 28 पद स्वीकृत है। इनमें से 16 पद रिक्त है। स्कूल में अर्थशास्त्र, संस्कृत, भुगोल, कम्प्यूटर विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी के शिक्षक का पद रिक्त है। स्कूल के रिकार्ड के अनुसार 12 शिक्षक तैनात है, इनमें से 10 शिक्षक विज्ञान विषय के है। इसे कई बार बच्चों का क्लास नहीं लग पाती है। मजे की बात है कि अंग्रेजी स्कूल होने के बावजूद यहां अंग्रेजी के शिक्षक का तीन पद रिक्त हैं। अंग्रेजी के शिक्षक का पांच पद स्वीकृत है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन के साथ छात्रों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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शिक्षकों के अभाव में स्कूल को संचालित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। दूसरे स्कूल से शिक्षकों को बुलाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं, कई बार शिक्षक अवकाश पर चले जाते है, ऐसे में और परेशानियां बढ़ जाती है।
- अजय शर्मा, प्रधानाचार्य नगला गुजरान
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शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यालय से शिक्षक की मांग की गई है। शिक्षक आने के बाद उन्हें वहां तैनात कर दिया जाएगा। इसके बाद विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रूप से चलेगी।
- आशा दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी