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जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाने वाले आपदा मित्रों के लिए देश कृतज्ञ: अनूप धानक

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अमर उजाला ब्यूरो
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फरीदाबाद। प्रदेश के आपदा प्रबंधन एवं राजस्व राज्यमंत्री अनूप धानक ने कहा कि आपदा कभी भी समय बताकर नहीं आती और कभी भी और किसी भी रूप में भयानक स्थिति पैदा कर देती है। ऐसे में हमें इससे निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। पहले से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ जैसी फोर्स आपदा से निपटने के लिए मौजूद हैं, लेकिन अब पूरे देश में आपदा मित्र भी किसी भी आपदा से निपटने के लिए देशवासियों से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। अनूप धानक शुक्रवार को सूरजकुंड स्थित होटल राजहंस में एक दिवसीय आपदा मित्र सम्मलेन में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
राज्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की यह सराहनीय योजना है और हरियाणा सरकार इसमें पूरी तरह से कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने के लिए कृतसंकल्प है। देशभर में जहां अबतक 87 हजार आपदा मित्र तैयार हो चुके हैं। वहीं, हरियाणा भी अपने सात जिलों में 2100 आपदा मित्र तैयार कर चुका है। उन्होंने हिमाचल, उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के सभी राज्यों में आई भीषण बाढ़ और गुजराज में तूफान के दौरान आपदा मित्रों के सराहनीय कार्य के लिए सभी को बधाई दी। वित्तायुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश खुल्लर ने कहा कि किसी भी आपदा को देखकर मित्रता का भाव बहुत बड़ी बात है। उन्होंने इस दौरान देशभर से आए आपदा मित्रों को जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि आजादी के समय जब विस्थापन की सबसे बड़ी आपदा आई थी तो इस समय फरीदाबाद ने इसके लिए उदाहरण प्रस्तुत किया था। राजेश खुल्लर बताया कि फरीदाबाद का एनआईटी क्षेत्र कम्युनिटी और कोआपरेटिव के सहयोग से बसाया गया देश का पहला सुनियोजित शहर है। आपदा मित्र योजना देशभर में दो लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों को तीन साल के अंदर तैयार करने की बड़ी ही बेहतरीन योजना है। शुरुआती तौर पर देश के 250 आपदा प्रभावित जिलों का शामिल किया गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य राजेंद्र सिंह ने बताया कि स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए पूरे भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इस योजना का उद्देश्य सामुदायिक स्वयंसेवकों को बुनियादी कौशल प्रदान करना है, जिनकी उन्हें आपदा के दौरान और उसके बाद अपने समुदाय की तत्काल आवश्यकता पर प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यकता होगी। प्रत्येक स्वयंसेवक को एक आपातकालीन प्रतिक्रिया किट और तीन साल के लिए बीमा कवर और जिला/ब्लॉक स्तर पर आपातकालीन प्रतिक्रिया रिजर्व प्रदान किया गया है।
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इन लोगों को चुना गया

इस योजना के तहत आपदा मित्र और आपदा सखी को नागरिक सुरक्षा, होम गार्ड, एनवाईकेएस, एनसीसी, पीआरआई और गांवों से चुना गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। स्वयंसेवकों को जिला प्रशासन और विपरीत परिस्थितियों में कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया ताकि दोनों आसानी से तालमेल और सामंजस्य में काम कर सकें। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी ने बताया कि स्वयंसेवकों को अग्नि, सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा, खोज एवं बचाव और जीवन रक्षक तकनीकों से संबंधित व्यावहारिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया है। उपायुक्त विक्रम सिंह सहित सभी प्रदेशों से पहुंचे आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी व वालेंटियर मौजूद थे।
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चार अलग-अलग सत्रों में आयोजित किया
पूरा कार्यक्रम चार अलग-अलग सत्रों में आयोजित किया गया। इसमें उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाली आपदा के लिए हिमाचल प्रदेश, मिजोरम व सिक्किम के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुति दी गई। दिल्ली, यूपी व हरियाणा के आपदा मित्रों द्वारा अपने प्रदेशों में आपदा मित्रों की सफलता की कहानियां दिखाई गई। आंध्र प्रदेश, गुजरात और उड़ीसा के आपदा मित्रों द्वारा तूफान के दौरान आने वाली आपदा की प्रस्तुति दी गई। इसमें एनडीएमए के संयुक्त सचिव लेक्रिनेंट कर्नल सूर्य प्रकाश पांडेय ने आपदा मित्र स्कीम की अप स्केलिंग की जानकारी दी। विभागाध्यक्ष एवं सदस्य कमल किशोर ने सभी को आपदा मित्र स्कीम के बारे में बताया। इसमें देशभर के 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के आपदा मित्रों (डेलीगेट व वालियंटर) शामिल हुए।
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