फदर्स डे आज-
किसी ने घर बेचा तो किसी ने दे दी अपनी किडनी
पिता के संघर्ष की कहानी, खुद तपे लेकिन बच्चों पर नहीं आने दी आंच
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पिता के संघर्षों को शब्दों में पिरोना आसान नहीं है, बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए पिता खुद तपते हैं, लेकिन परिवार को किसी भी प्रकार से आंच नहीं आने देते। बच्चों का जीवन बदलने से लेकर अंगदान करने से भी पीछे नहीं हटे हैं। वैसे सभी पिता बेहद खास हैं, लेकिन आज पिता दिवस पर कुछ ऐसे लोगों के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए सब कुछ त्याग दिया। आज उनके बच्चे देश-विदेश में परचम लहरा रहे हैं।
घर बेचकर किराये पर आ गए, नहीं मानी हार
पैरालंपिक खिलाड़ी मनीष के पिता दिलबाग सिंह नरवाल के अनुसार बेटे का दायां हाथ जन्म से ही खराब था। बेटे के भविष्य की चिंता सता रही थी। अकसर बच्चे के बारे में सोचकर उदास हो जाते थे, तब उनके एक मित्र ने निशानेबाजी खेल में हाथ आजमाने की सलाह दी। इसके बाद मनीष ने बाएं हाथ से निशानेबाजी का अभ्यास करना शुरू कर किया। मनीष को पिस्टल की जरूरत पड़ी। अब पिस्टल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे तो पिता दिलबाग ने सात लाख रुपये में मकान बेचकर बेटे को पिस्टल थमा दी। जिसके बाद पूरा परिवार सेक्टर-64 में किराया पर रहने लगे। इसके बाद बेटे ने कड़ी मेहनत की और पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। मनीष के छोटे भाई-बहन शिवा व शिखा भी निशानेबाज हैं। आज बच्चे विदेशों में परचम लहरा रहे हैं।
किडनी देकर बचाई बेटे की जान
माता पिता अपने बच्चे से कितना प्यार करते हैं, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है, जब बच्चे की जान पर बन आए तो अपनी जान की परवाह किये बगैर हाजिर हो जाते हैं। 54 वर्षीय जिले सिंह ने अपनी किडनी देकर 26 वर्षीय बेटे देवेंदर को बचाया। बेटे की किडनियां फेल हो चुकी थीं और पिछले 2 वर्षों से डायलिसिस पर था। उसकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा था। बेटे की हालत पिता से देखी नहीं जा रही थी, जिले सिंह ने अपने बेटे को अपनी एक किडनी देने का निर्णय किया और जांच के बाद किडनी देकर अपने बेटे की जान बचा ली। अब देवेंद्र बिल्कुल स्वस्थ हैं।