अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में प्रदूषित हवा से लोगों का दम घुटने लगा है। सेक्टर-11 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गंभीर श्रेणी में 414 के स्तर पर पहुंच गया है। गंभीर श्रेणी में पहुंचते ही शहर में ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। अस्पतालों में श्वास और हृदय रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। ऐसे में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और बीके अस्पताल की ओपीडी में कुल 500 से अधिक दमा से प्रभावित मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से फरीदाबाद के प्रदूषण स्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ था। हवा तेज चल रही थी, जिसके चलते प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में ही बना हुआ था। बृहस्पतिवार को एक दम से काफी बढ़ गया है। वहीं अलग-अलग कारणों से पैदा होने वाले प्रदूषित कण एक जगह इकट्ठा होने शुरू हो गए। स्मॉग भी बनना शुरू हो गया। सुबह हल्की धुंध देखने को मिली, जिसके बाद ये बढ़ गई। दोपहर को तेज धूप निकलने के बाद धुंध कुछ कम हुई, लेकिन शाम को फिर से एक बार दिखाई देने लगी।
कई दिनों से प्रदूषण बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ था, लेकिन अब एकदम से यह गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी सूची के अनुसार बृहस्पतिवार को फरीदाबाद का 368 दर्ज किया गया। बुधवार की तुलना में यह 59 अंक अधिक रहा। बुधवार को फरीदाबाद का एक्यूआई 309 दर्ज किया गया था। इससे दिन भर लोगों को आंखों में जलन और श्वास लेने में दिक्कत हुई है। वहीं, दूसरी तरफ अस्पतालों में भी श्वास और हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ओपीडी में 15 से 20 प्रतिशत मरीज बढ़ गए हैं।
सेक्टर-11 में फूली लोगों की सांसें
सेक्टर-11 क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक 414 रहा। वहीं, सेक्टर 16ए क्षेत्र में 391, सेक्टर 30 क्षेत्र में 360 और एनआईटी क्षेत्र का एक्यूआई 421 दर्ज किया गया। बल्लभगढ़ क्षेत्र की हवा भी बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है। यहां का एक्यूआई 323 दर्ज किया गया।
सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू
प्रदूषण का स्तर बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में पहुंचने के बाद नगर निगम की ओर पानी का छिड़काव शुरू कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण कम करने के लिए वाटर स्प्रिंकलर मशीन से पानी का छिड़काव किया गया। इसके साथ ही नगर निगम सहित अगल-अलग स्थानों पर एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया गया, जिससे सड़कों पर धूल-मिट्टी न उड़े।
ग्रैप स्टेज-3 की ये पाबंदियां हुईं लागू
- जरूरी निर्माण को छोड़कर अन्य निर्माण पर रोक।
- ईंट भट्टे, हॉक मिक्स प्लांट, स्टोन क्रशर का कार्य बंद।
- एनसीआर में माइनिंग से जुड़ी गतिविधियां पर रोक।
- राज्य सरकार की ओर से बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल कारों पर रोक।
- स्टेज एक व दो की बंदिशें पूर्ववत रहेंगी।
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श्वांस व हृदय रोगियों के लिए घातक है धुंध
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ओपीडी में लगभग सांस की बीमारियों से पीड़ित 350 मरीज आने लगे हैं। इसके अलावा बीके अस्पताल में भी करीब 150 दमा से जुड़े मरीज पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीन मलिक ने कहा कि सुबह व शाम के समय घर से बाहर निकलने से परहेज करें। धूप निकलने पर बाहर निकलें। पहले से बीमार लोग अपनी दवाएं नियमित रूप से लेते रहें। डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। स्मॉग व ठंड दिमाग के साथ श्वास व हृदय रोगियों के लिए घातक साबित हो सकती है। इसलिए लोगों को इस दौरान अपना खास ध्यान रखने की जरूरत है।
वर्जन
हवा की गति थम जाने से प्रदूषित कण एक जगह इकट्ठा होने लगे हैं। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। हवा चलने पर यह फिर से कम हो जाएगा। हम प्रदूषण संबंधित गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
- संदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
पिछले कुछ दिनों का वायु गुणवत्ता सूचकांक
तारीख एक्यूआई
29 अक्तूबर 272
30 अक्तूबर 309
31 अक्तूबर 300
1 नवंबर 309
2 नवंबर 368