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Faridabad News: प्रभु श्रीराम का जन्म के साथ रामलीला मंचन

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। जिले में कई जगहों पर रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। कहीं, प्रभु श्री राम का जन्म तो राक्षसी ताड़का के वध का दृश्य दिखाया गया। सेक्टर 14 स्थित श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी ट्रस्ट द्वारा रामलीला का मंचन 17 अक्तूबर से शुरु किया जाएगा। इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है। रामलीला देखने काफी लोग पहुंच रहे हैं।

एनआईटी 5 नंबर एम ब्लॉक स्थित दुर्गा मंदिर के पास श्री धार्मिक लीला कमेटी द्वारा पहले दिन राम जन्म का मंचन किया गया। पूर्व मंत्री एसी चौधरी ने रामलीला का शुभारंभ किया। रामलीला के मंच पर फरीदाबाद की किक बॉक्सिंग खिलाड़ी मोनल व नीरल कुकरेजा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। निर्देशक हरीश चन्द्र आजाद ने बताया कि रामलीला के पहले दृश्य में राजा दशरथ दरबार में उदास व दुखी होते हुए गुरु वशिष्ठ को संतान न होने का दर्द बताते हैं। इस पर गुरु वशिष्ठ के कहने पर पुत्र श्रेष्ठ यज्ञ करवाते हैं। दशरथ के यहां 4 पुत्र जन्म लेते हैं। जिनके नाम राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न रखे जाते हैं। दशरथ के किरदार में पंकज खरबंदा व वशिष्ठ के किरदार में संचित ने अपने अभिनय का जादू बिखेरा। विश्वामित्र राम व लक्ष्मण को लेकर वन में जाते हैं जहां श्रीराम के हाथों ताड़का का वध हो जाता है। छोटे राम काव्य खरबंदा व छोटे लक्ष्मण पारस खरबंदा ने मासूम से चेहरे से दर्शकों का दिल जीता। दर्शकों की वोटिंग द्वारा प्रथम पुरस्कार विश्वामित्र के किरदार अमित नागपाल को मिला। दूसरा पुरस्कार दशरथ बने पंकज खरबंदा ने जीता।
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ले जन्म कोख से तेरी मैं दशरथ नंदन कहलाऊंगा
मार्किट नंबर 1 में स्थित विजय रामलीला कमेटी द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्म और राक्षसी ताड़का के वध का दृश्य को दिया गया। पहले दृश्य में श्री हरि विष्णु माता कौशल्या के स्वप्न में आते हैं और उन्हें विराट रूप में दर्शन देकर उनके गर्भ में स्थान मांगते दिखाई पड़े। कमेटी द्वारा तैयार किया भव्य विराट रूप का आकर्षण देखते बनता था। विष्णु की भूमिका में निमिष सलूजा और कौशल्या बने मनोज शर्मा ने मनभावने प्रदर्शन से उमड़े जन समुदाय का दिल जीत लिया। विष्णु ने माता कौशल्या से कहा ले जन्म कोख से तेरी मैं दशरथ नंदन कहलाऊंगा, मिटा कर वंश असुरों का तेरी कीर्ति बढ़ाऊंगा। इसी दृश्य के बाद भगवान राम सहित अन्य तीनों भाइयों के जन्म की खुशियां मनाई गई। दूसरे दृश्य में विश्वामित्र ने दशरथ के दरबार में जाकर राम और लक्ष्मण की मांग रखी। राक्षसी तड़का का मंचन कलाकारों से पंजाबी भाषा में किया। वहीं, राजा जनक ने स्वयंवर का एलान किया।
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