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Faridabad News: चांद को छलनी में देखकर पति की सलामती के लिए की प्रार्थना

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- मंदिरों में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुई और एक-दूसरे फिर आपस में करवे बदले
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। करवा चौथ पर्व पर सुहागिनों ने व्रत रखकर चांद से पति की सलामती की प्रार्थना की। हरियाणा दिवस की छुट्टी के चलते महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों को भी घर पर समय बिताने का वक्त मिला। एनएच 5 स्थित हरि मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुई और एक-दूसरे को करवा चौथ की संपूर्ण कथा सुनाई फिर आपस में करवे बदले। इसी प्रकार ग्रेटर फरीदाबाद स्थित बीपीटीपी इलाइट प्रीमियम में नेहा शर्मा व अन्य ने मिलकर विधिवत पूजन किया और चांद निकलने के बाद छलनी से अपने पति को निहारा।
सेक्टर-16 के दयानंद एंक्लेव में महिलाओं ने एकत्रित होकर पूजा की और सभी एक-दूसरे के साथ करवे बदले। पतियों के दर्शन करने के बाद अधिकतर विवाहित जोड़े अपने सहयोगी के साथ समय बिताने के लिए शहर के होटल एवं रेस्त्रां में पहुंचे। होटल एवं रेस्टोरेंट मालिकों ने भी इसके लिए पहले से तैयारियां की हुई थी और बहुत सुंदर इंतजाम वैवाहिक जोड़ों के लिए किए हुए थे। करवा चौथ को लेकर स्पेशल डिस्काउंट भी दिया जा रहा था। इतना ही नहीं, रेस्त्रां में इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि पति-पत्नी अपना कीमती समय अकेले में बिता सकें। कई जगह गार्डन में बहुत सुंदर लाइटिंग की हुई थी। पिछले कुछ समय से इस परंपरा का लगातार प्रचलन बढ़ता जा रहा है और शहर के कई होटल एवं रेस्टोरेंटों में लोगों की भीड़ देखने को मिली।
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मिट्टी के करवों के साथ खांड के करवों की भी रही खासी डिमांड
करवा चौथ के दिन महिलाएं करवा एवं दीये खरीदने के लिए अपने नजदीकी मार्किट में पहुंची। मिट्टी वाले करवे की कीमत 25 से 30 रुपये थी, वहीं खांड के करवे की कीमत 120 रुपये थी। ओल्ड फरीदाबाद, एनआईटी 1 एवं एनआईटी 5 की मार्किट में महिलाएं खरीदारी करते हुए देखी गई। महिलाओं ने मिट्टी के करवे के साथ-साथ खांड का करवा भी खरीदा, जोकि मीसने का काम आता है। प्रथा के अनुसार खांड से बने करवे को मीसकर साड़ी, चूड़ा एवं अन्य शृंगार के साथ ननदों को दिया जाता है।
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करवा चौथ की रस्में और उत्सव

फरीदाबाद में विशेषकर करवा चौथ को अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाएं अपने अंदाज में मनाती हैं। एनआईटी क्षेत्र पंजाबी समुदाय की घनी आबादी वाला क्षेत्र हैं, इसलिए यहां पर आधुनिकता का एक मिश्रण देखने को मिलता है। इसी प्रकार ग्रेटर फरीदाबाद या नहर पार के क्षेत्र में सोसायटियों में रहने वाले लोग अलग-अलग क्षेत्रों से है, तो उनकी मिश्रित परंपराओं को इस दिन देखा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आज भी अपनी पुरानी परंपराओं एवं प्रथाओं के साथ उपवास करती हैं। चंद्रोदय के बाद, महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा को देखा और फिर अपने पतियों को देखा। पति का पूजन करने के बाद दिन भर के उपवास को समाप्त किया और जल और भोजन का पहला निवाला चढ़ाते हैं। जिन महिलाओं के पति उनके पास नहीं है, या कहीं दूर हैं, उन्होंने वीडियो काॅलिंग के जरिए अपने पतियों के दर्शन किए।
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