- विज्ञापन लगाने में आर्थिक नुकसान पहुंचने वाले अभियंताओं पर होगी कार्रवाई
- अब नगर निगम आयुक्त को लेना है निर्णय, एनआईटी और ओल्ड फरीदाबाद जोन में एग्रीमेंट के कागजातों में छेड़छाड़
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम क्षेत्र में विज्ञापन लगाने संबंधित कार्याेंं में तत्कालीन अधिकारियों से कई गड़बड़ी की हुई हैं। इससे नगर निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसे लेकर एक रिपोर्ट में कहा गया हैं कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है और इससे संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती हैं कि अधिकारियों ने जानबूझ कर एग्रीमेंट के कागजातों में छेड़छाड़ की। अब देखना होगा कि इस मामले में किन-किन पर गाज गिरती है।
नगर निगम ने साल 2018-19 में ओल्ड फरीदाबाद, एनआईटी और बल्लभगढ़ जोन में यूनिपोल, पोल समेत अन्य विज्ञापन लगाने का ठेका अलग-अलग कंपनियों को दिया था। इसके तहत कंपनियों ने पूरे शहर में करीब 225 यूनिपोल लगाकर विज्ञापन की फीस कंपनियों से वसूली। इसके अलावा पोल बोर्ड समेत अन्य के माध्यमों से विज्ञापन फीस वसूली। इसमें एग्रीमेंट के अनुसार निगम को पैसे भी मिले। साल 2020-21 में नगर निगम सदन में कुछ पार्षदों ने विज्ञापन में गड़बड़ी का मामला उठाया। उनका कहना था कि विज्ञापन मामले में बड़े स्तर पर हेरफेर हो रही है और निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस पर तत्कालीन निगम आयुक्त ने एक कमेटी बनाकर मामले की जांच की। जांच अधिकारी ने पाया कि विज्ञापन कंपनियों ने तय मानक के अनुसार यूनिपोल या अन्य विज्ञापन बोर्ड शहर में नहीं लगाए। इनकी तय साइज, लोकेशन समेत अन्य में गड़बड़ी की गई। यहां तक एग्रीमेंट के कागजातों में छेड़छाड़ की गई है। जांच अधिकारी ने बताया कि इस कार्य को देखते हुए एक अलग से इंजीनियर नियुक्त करने का प्रावधान था, लेकिन लागू नहीं किया गया। अधिकारी ने करीब छह पेज में इस पर रिपोर्ट दी, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह रिपोर्ट दबा दी गई।
अभियंताओं की भूमिका मिली संदिग्ध
नगर निगम ने 2022-23 में विज्ञापन कंपनियों को लाइसेंस आगे नहीं बढ़ाया और उनसे बकाया लाखों रुपये फीस जमा करने को कहा। इसी दौरान कुछ विज्ञापन कंपनियां कोर्ट में चली गई। इसके बाद विज्ञापन संबंधी कार्य नगर निगम सचिव जयदीप को दिया गया। सूत्रों के अनुसार जांच में अधिकारी ने पाया कि नगर निगम और विज्ञापन कंपनियों के बीच हुए एग्रीमेंट के कागजातों में छेड़छाड़ की गई। सूत्रों के अनुसार अधिकारी ने कुछ अभियंताओं की भूमिका संदिग्ध माना हैं। हालांकि अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त और मुख्य अभियंता को भेजी हुई हैं। इसी बीच पिछले सप्ताह अधिकारी से विज्ञापन का कार्य लेकर एसई को सौंप दिया गया। यह मामला तूल पकड़ लिया और सीएम तक के संज्ञान में हैं। बता दें कि नगर निगम अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए विज्ञापन नीति पर काम करा था, लेकिन यह भी योजना विवादों में हैं। पैसे की कमी से निगम को विकास कार्य कराने में परेशानी होती है।
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एग्रीमेंट से एमसीएफ शब्द हटाया
जांच के दौरान पता चला कि ओल्ड फरीदाबाद और एनआईटी जोन में नगर निगम और विज्ञापन एजेंसियों के बीच जो अनुबंध हुआ, इसमें कई जगहों पर एमसीएफ (नगर निगम फरीदाबाद) को हटा दिया गया। यदि भविष्य में कोई मामला कोर्ट या विज्ञापन एजेंसियों पर जुर्माना अन्य कार्रवाई करना हो तो निगम का पक्ष कमजोर हो जाए। सूत्रों के अनुसार एग्रीमेंट में करीब 104 जगहों से एमसीएफ शब्द नहीं मिला, जबकि, ऐसा होना चाहिए था। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार ऐसा निगम के अभियंताओं से जानबूझ कर किया ताकि विज्ञापन एजेंसियों को लाभ पहुंचाया जाए। रिपोर्ट में कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है और इसे विभिन्न आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।