संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। बीके अस्पताल में आने वाले मरीज सही उपचार नहीं मिलने से परेशान हैं। आरोप है कि अस्पताल में परामर्श तो डॉक्टरों द्वारा दिया जाता है लेकिन दवाइयों के लिए मरीजों को इधर उधर भटकना पड़ता है। दवाई नहीं मिलने पर मरीजों को दवा खरीदने के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है।
बीके अस्पताल में हर रोज दो हजार से ज्यादा मरीज उपचार के लिए आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या सामान्य रोग, हड्डी रोग और बाल रोग विशेषज्ञ के मरीजों की होती है। डॉक्टर द्वारा मरीजों को बुखार व खांसी की दवा लेने के लिए कहा जाता है, लेकिन जब मरीज दवा काउंटर पर जाता है, तो उनको पता चलता है कि खांसी और बुखार की दवा एक माह से खत्म है। इसलिए मरीज को दवा निजी केंद्रों से खरीदनी पड़ रही है।
एक माह से नहीं आ रही दवा
अस्पताल के स्टोर में पिछले एक माह से खांसी की दवा नहीं आ रही है। इसके अलावा मरीजों को बुखार में दी जाने वाली पेरासीटामॉल का सीरप भी खत्म हो गया है। वहीं, दर्द की दवा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है। अभी अस्पताल में 30 प्रतिशत दवाओं की कमी है। डॉक्टर जो दवा मरीजों को लिख रहे हैं। उनमें से आधी दवा ही मिल रही है। वहीं अन्य दवा मरीजों को बाहर से खरीदने के लिए कहा जा रहा है।
गर्भवतियों को नहीं मिल रही आयरन की दवा
गर्भवतियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बीके अस्पताल के पास आयरन की दवा भी नहीं है। महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवतियों को आयरन की दवा खाने के लिए कहते हैं, लेकिन अस्पताल के स्टॉक में आयरन की दवा भी उपलब्ध नहीं है। यह समस्या काफी समय से चल रही है।
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खांसी के सीरप दिसंबर के महीने में खत्म हुए हैं। वियर हाऊस से दवाइयों की मांग की गई है। जोकि जल्द आने की उम्मीद है। उसके बाद मरीजों को सभी दवा अस्पताल से मिलेंगी। - डॉं सविता यादव, पीएमओ