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स्कूल के समय से सेना में जाकर देश सेवा की बात करते थे शहीद मनोज भाटी

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बल्लभगढ़। शहीद मनोज भाटी के पिता बाबूूलाल ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। शुक्रवार को दिन भर शहीद के घर लोगों का आना-जाना लगा रहा। शहीद का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पहुंचना था, लोग दिनभर अपने वीर सपूत का इंतजार करते रहे। हालांकि शाम को पता चला कि शनिवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा। बड़े भाई सुनील ने बताया कि स्कूल समय से ही मनोज सेना में जाकर देश सेवा करने की बात करते थे।
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जम्मू कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में सैनिक कैंप पर हुए आतंकी हमले में गांव शाहजहांपुर निवासी मनोज भाटी शहीद हो गए। पिता ने बताया कि बृहस्पतिवार को बेटे के शहीद होने की सूचना फोन पर मिली थी। वहीं, बड़ा भाई सुनील भी सेना में है। सूचना मिलते ही देर रात वह गांव पहुंचे। सुनील भाटी ने बताया कि वह नौ साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। उस दौरान मनोज की पढ़ाई चल रही थी। मनोज सभी भाई बहन में छोटा होने की वजह से लाडला था। उसके भविष्य की चिंता हर किसी को होती थी। फिर भी वह हमेशा एक बात कहता था कि वह भी देश की रक्षा करेगा और गांव व देश का नाम रोशन करेगा। सुनील का कहना है कि आज भाई अपनी बात को सही साबित कर गया। मनोज भाटी के ऊपर पूरे देश के साथ गांव वालों व परिवारवालों को गर्व है।
सदमे में पत्नी, बहन भी बीमार
शहीद मनोज भाटी की पत्नी कोमल पति के शहादत की बात सुनकर सदमे में है। 14 नवंबर साल 2021 को मनोज भाटी की शादी कविता के साथ हुई थी। पति की शहादत की बात सुनने के बाद कविता सदमे में है। कविता आठ माह की गर्भवती है। बृहस्पतिवार देर रात उसकी तबीयत खराब होने पर उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। बहन भी बीमार चल रही है। मां, पत्नी और बहन सदमे से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
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रायफल शूटिंग में सबसे बहेतर:
दोस्त सूरज भाटी ने बताया मनोज ने राइफल चलाने में काफी अच्छी ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग के दौरान मनोज भाटी का नाम गोल्ड मेडल के लिए भेजा गया था लेकिन फाइनल राउंड में बाहर हो गए थे। मनोज निशानेबाजी में काफी अच्छे थे।
दो दिन पहले मिला था मनोज भाटी से
गांव शाहजहांपुर निवासी सूरज भाटी ने बताया कि उसने और शहीद मनोज भाटी ने 27 मार्च 2017 को ऑर्मी ज्वाइन की थी। दोनों ने दिल्ली में एक साथ ट्रेनिंग भी की। सूरज भाटी ने बताया कि उसकी पोस्टिंग भी राजौरी में ही है। शहीद मनोज भाटी की दूसरे बेस कैंप में पोस्टिंग थी। नौ अगस्त को मनोज भाटी से उनके कैंप में मिलकर आए और कहा की घर चलते हैं। जिस पर मनोज ने कहा था कि अभी डेढ़ महीने की छुट्टी काट कर आया हूं। अभी छुट्टी नहीं मिलेगी। इस दौरान घर के बारे में चर्चा की थी। उसे पत्नी को लेकर चिंता थी।
गणित सबसे पसंदीदा विषय
सहपाठी कन्हैया ने बताया कि शहीद मनोज भाटी के साथ नर्सरी कक्षा से पढ़ाई की है। मनोज का बचपन से एक ही मकसद था सेना में जाकर देश की सेवा करना। स्कूल में भी वह ज्यादातर सेना की बातें करता था। कन्हैया ने बताया कि स्कूल में उसका पसंदीदा विषय गणित था।। दोनों ने एक साथ सेना का फिजिकल दिया था लेकिन वह कुछ अंकों से पीछे रह गया। कुछ दिन पहले जब वह छुट्टी पर आए तो बताकर गए थे कि कैसे सेना की तैयारी करें।
गांव के युवाओं को देते थे ट्रेनिंग
गांव निवासी बंसी, कृष्ण, कन्हैया, विक्रम, संदीप, कपिल, संजय, बंटी आदि ने बताया कि शहीद मनोज जब भी छुट्टियों में गांव में आते तो सेना में भर्ती होने के लिए ट्रेनिंग देते थे। सुबह व शाम दौड़ भी लगाते थे। वह युवाओं का मनोबल बढ़ाते थे। दोस्त सूरज ने बताया कि मनोज को बाहर का खाना बिल्कुल पसंद नहीं था।
युवाओं ने शहीद के नाम बनवाई टीशर्ट
शहीद मनोज भाटी के गांववासी अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। जहां एक ओर गांव के पूर्व सरपंच जहार सिंह के द्वारा गांव में जगह-जगह मनोज भाटी के बैनर लगाए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर गांव के युवाओं के द्वारा मनोज भाटी अमर रहें की टी शर्ट बनवाई गई हैं। गांव के युवा उस टी शर्ट को पहन कर शनिवार की सुबह आईएमटी से सम्मान पूर्वक शहीद मनोज भाटी का पार्थिव शरीर लेकर आएंगे। जिसमें हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहेंगे।
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