फरीदाबाद खोरी गांव में तोड़फोड़ को लेकर दुकान का सामान निकालते हुए ।
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फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई में खोरी गांव में तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान बेघर हुए लोगों को पुनर्वासित करने के लिए कहा है। कोर्ट के फैसले का खोरीवासियों ने स्वागत किया है। साथ ही सभी प्रकार के अवैध निर्माण को तोड़ने के दोबारा आदेश दिए गए हैं। लोगों ने कहा कि यदि गरीबों के घर टूटे हैं तो अमीरों के अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके पहले 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना को लेकर यदि लोगों में कोई आपत्ति हो तो वह दर्ज करवा सकता है। इस मामले में तीन अगस्त को सुनवाई तय की गई थी। मंगलवार को कोर्ट में हुई सुनवाई में नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त डॉ. गरिमा मित्तल, निगमायुक्त यशपाल और प्रवासी संगठन वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारी मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वन विभाग की जमीन पर बने सभी अवैध निर्माण तय समय 23 अगस्त तक हटाए जाएं। जंगल की जमीन से किसी प्रकार से समझौता नहीं किया जा सकता। नगर निगम ने कोर्ट से कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करेंगे।
वन विभाग की जमीन पर राधा स्वामी सत्संग है तो उसे भी हटाएं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जंगल की जमीन पर अवैध निर्माण हटाने के दौरान निगम वीडियोग्राफी भी करे। कोर्ट ने निगम से कहा कि खोरी गांव के नजदीक ही एक नोडल ऑफिसर नियुक्त किया जाए, जिससे गांव के लोग अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग पुनर्वास योजना के तहत हकदार होंगे। उन्हें पुनर्वास किया जाएगा। कोर्ट ने वन विभाग की जमीन पर राधा स्वामी सत्संग को लेकर भी कहा, यदि ये अवैध है तो इसको भी हटाया जाए।
निगम 23 अगस्त तक पुनर्वास नीति के ड्राफ्ट को पूरा करे। इस पर खोरी वासियों ने खुशी जताई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली से सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रशंसा करते हैं। हमारी एक ही मांग थी कि खोरी गांव में जिन लोगों के मकान तोड़े जाएं, उन्हें पुनर्वासित किया जाए। प्रवासी वेलफेयर सोसाइटी की सदस्य सपना गुप्ता ने कहा कि कोर्ट के फैसले से खुशी मिली है। इससे आखिरकार सभी लोगों को घर मिल सकेंगे।