संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। होली पूजन में अब कुछ दिन शेष बचे हैं। ऐसे में गांवों में महिलाओं ने गोबर की बुरकली बनानी शुरू कर दीं हैं। होली तक बुरकली सूख जाएंगी और माला बनाने में आसानी होगी। होलिका दहन वाले दिन इन मालाओं को होलिका पर रखा जाता है। बुरकलियों को बनाने के लिए भैंस या गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है। गांव सागरपुर की महिला तिलपत, प्रीति, गीता, शारदा ने बताया कि होली पूजन के लिए गोबर की बुरकली, जौ या गेहूं की बाली, कच्चा सूत, हल्दी आदि सामान की जरूरत होती है। इसलिए अब बुरकली बनानी शुरू कर दी हैं। होली वाले दिन गांव की सभी महिलाएं व्रत रखती हैं। दोपहर 12 बजे के बाद गांव की महिलाएं एक साथ इकट्ठा होकर होलिका पूजन के लिए जाती हैं।