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Faridabad News: हाथों से राम मंदिर का प्रतिरूप बनाकर बाइक से अयोध्या रवाना ग्राफिक डिजाइनर

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- प्रतिरूप तैयार करने में लगा 25 दिन का समय, 80 किलो है वजन
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- प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या से रामलला की मूर्ती लेकर वापस लौटेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अयोध्या में होने वाले रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हर कोई अपना योगदान देना चाह रहा है। इसी क्रम में भक्ति के रस में डूबे शहर के एक युवक ने हाथों से राम मंदिर का प्रतिरूप बनाया। इस काम में उसे करीब 25 दिन का समय लगा। 80 किलो वजन के मंदिर को बाइक पर लेकर युवक रविवार को अयोध्या के लिए रवाना हो गया। प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला की मूर्ती लेकर वापस वापस घर आएगा।
मूल रूप से बिहार के मिथिला का निवासी मिथुन (30) फरीदाबाद के सेक्टर-30 में रहता है। पेशे से ग्राफिक डिजाइनर मिथुन ने बताया कि वह श्रीराम का भक्त है। पिछले 25 दिनों से वह घर में ही राम मंदिर का प्रतिरूप तैयार कर रहा था। इस काम के लिए उनके ऑफिस से भी उन्हें आसानी से छुट्टी मिल गई। मिथुन ने बताया कि उन्होंने सांगवान की लकड़ी और प्लाई का इस्तेमाल कर राम मंदिर का निमार्ण किया है। इस काम में वैसे तो पूरा परिवार ही उनके साथ लगा रहा लेकिन छोटे भाई सागर ने सबसे ज्यादा योगदान दिया। सागर पेशे से इलेक्ट्रीशियन है। मंदिर में रात के समय लाइट भी जलती है। इसके लिए मंदिर की चोटी से लेकर नीचे तक बिजली की तार लगाई गई है। गोल्डन रंग से रंगने के बाद इसमें श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की छोटी सी मूर्ती लगाई गई है। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन इस मंदिर की पूजा करने के बाद मिथुन अपने बनाए मंदिर में रामलला की मूर्ती लगाएंगे।
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बाइक से तय करेंगे अयोध्या तक का सफर
मिथुन ने बताया कि उन्होंने मंदिर को बाइक के पीछे बांध लिया है। इसकी फिटिंग इस तरह से की गई है कि यह गिरेगा नहीं। वह अपना पूरा सफर बाइक से ही पूरा करेंगे। रात के समय मंदिर की लाइट जलाकर रखेंगे। घर से निकलते समय उन्होंने अपने साथ खाने पीने का कोई सामान साथ नहीं लिया है। मिथुन का कहना है कि वह राम का नाम लेकर घर से निकले हैं अब सफर उनके भरोसे है। सुरक्षा के लिए उन्होंने अपने साथ हेलमेट और नी गार्ड ( घुटनों पर पहने जाने वाला सुरक्षा उपकरण ) लिया है। मंदिर में करीब 80 किलो वजन है। अयोध्या में पूजा करने के बाद इस मंदिर में रामलला को लेकर वापस आएंगे और घर में स्थापित करेंगे।
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