संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। सरकार की वादा खिलाफी के विरुद्ध किसान, मजदूर व कर्मचारियों का महापड़ाव दूसरे दिन सोमवार को भी जारी रहा। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज के समीप अटोहां पर चल रहे महापड़ाव में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पड़ाव में गुरुग्राम, नूंह, फरीदाबाद व पलवल की मिड डे मिल कार्यकर्ता जुलूस निकालकर पहुंचीं। पड़ाव में किसान नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन की तरह सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया जाएगा। किसानों व मजदूरों की मांगों को न मानने तक आंदोलन करते रहेंगे। महापड़ाव के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी। सोमवार को महापड़ाव की अध्यक्षता किसान नेता रूपचंद दलाल ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। धरने में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा व सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने शामिल होकर पड़ाव के मुद्दों का समर्थन किया।
पड़ाव को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेता सुभाष लांबा व नरेश शास्त्री ने कहा कि सरकार सफाई कर्मियों के पैर धोने का नाटक करती है, लेकिन वही सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं तो सरकार उनकी सुनवाई तक नहीं करती है। मिड डे मील, आशा व आंगनबाड़ी की महिला कार्यकर्ताओं की दुख तकलीफ व उनके मुद्दों को लगातार अनसुना किया जा रहा है। बिजली संशोधन बिल के पास होने के बाद बिजली, किसान व मजदूर के पहुंच से बाहर हो जाएगी, इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग की है। किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व सतपाल नरवत ने कहा कि सरकार किसान, मजदूरों व कर्मचारियों की दुख तकलीफ को अनदेखा कर रही है। सरकार बात तो गरीबों की करती है, लेकिन काम बड़े पूंजीपतियों के हित में करती है। उन्होंने कहा कि कहने को तो केंद्र सरकार किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, लेकिन किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। दूसरी तरफ किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी ने आज तक कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया है। पड़ाव में किसान व कर्मचारी नेता महावीर मलिक, नवल सिंह नरवत, रमेश चंद , श्रीपाल सिंह भाटी, श्रीचंद महाशय, जगदीश आर्य, बीर सिंह दलाल, देवी सिंह लांबा, अनिल कुमार, मूर्ति, भारती, वीरेंद्र सिंह, योगेश शर्मा व राजेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे।
किसान व मजदूर को पूर्ण रूप से कर्ज मुक्त किया जाए
किसान-मजदूर महापड़ाव में प्रमुख मांग हैं कि सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। किसान व मजदूरों को पूर्ण कर्ज मुक्त किया जाए। बिजली संशोधन विधेयक 2023 को वापस लिया जाए। श्रम कानूनों में किए गए संशोधन रद्द किए जाएं। पुरानी पेंशन स्कीम को लागू किया जाए। सरकारी विभागों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए तथा ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए। यूपी के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।