साइबर थाना एनआईटी की टीम ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले का बृहस्पतिवार को भंडाफोड़ किया है। जिसमें दो निजी बैंक के कर्मचारी सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी दिल्ली के सुभाष नगर में फर्जी कॉल सेंटर चलाते थे। यह लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के जाल में फंसाकर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस को आरोपियों के पास से दो डेबिट कार्ड, पांच मोबाइल फोन व 44 हजार रुपये बरामद हुए हैं। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। इसके साथ ही आरोपियों के अन्य साथियों की भी तलाश की जा रही है।
पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक, तुषार उर्फ गोल्डी, अक्षय, विनय उर्फ जॉनी, रूपक, मनीष, कुनाल तथा रवीश के रूप में हुई है। आरोपी रविश नोएडा, रूपक बिहार के मधुबनी व अन्य दिल्ली के रहने वाले हैं। सभी दिल्ली में कॉल सेंटर चलाते थे। अक्षय कॉल सेंटर का मालिक था, जबकि मनीष उसका पार्टनर था। कॉल सेंटर में आठवीं पास दीपक फोन करने का काम करता था। आठवीं पास तुषार ठगी के पैसों को एटीएम से निकालने का काम करता था। इसके अलावा रूपक बैंकों के फर्जी एप तैयार करने में माहिर था।
आरोपी रविश कोटक महिंद्रा बैंक में सहायक प्रबंधक और आरोपी कुनाल आरबीएल बैंक में नौकरी करता था। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों ने पिछले दिनों शहर के एक व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर उनके क्रेडिट कार्ड से 53 हजार रुपये निकाल लिए थे। एनआईटी साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। इसके लिए एक टीम गठित की गई। जिसमें थाना प्रभारी समेत उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह, एएसआई भूपेंद्र, मुख्य सिपाही नरवीर, सिपाही युद्धवीर, अंशुल और अमित शामिल थे। टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, यूपी और बिहार में छापा मारा। सभी आरोपियों को तीनों लोकेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों को बृहस्पतिवार को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
ऐसे फंसाते थे ठगी के जाल में
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पहले वह लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देते थे। लोगों के राजी होने पर वह उनके मोबाइल फोन पर एक एप भेजते हैं। एप के माध्यम से पुराने क्रेडिट कार्ड से 10 रुपये ट्रांजेक्शन करने को कहा जाता है। जैसे ही लोग एप में पुराने क्रेडिट कार्ड की सारी जानकारी भरते हैं, उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट को ये ट्रांसफर कर लेते थे और ठगी का शिकार बनाते थे।