कांवड़ लेकर जातीं बुजुर्ग महिलाएं
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कोरोना के कारण करीब ढाई साल बाद शुरू हुई कांवड़ यात्रा को लेकर युवाओं और बुजुर्ग महिलाओं में खासा उत्साह है। बुजुर्ग महिलाएं मीलों की दूरी पैदल तय कर कांवड़ लेने पहुंच रही हैं। श्रद्धालुओं की मानें तो भोलेनाथ ने उनकी हर बार मन्नत पूरी की है। जब तक पैरों में जान रहेगी, तब तक प्रभु के द्वार जाते रहेंगे। फरीदाबाद में भी श्रद्धालुओं के लिए शिविर लगे हैं। कांवड़ियों की सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह पुलिस बल तैनात है।
बेटे की नौकरी लगी तो शुरू की कांवड़ यात्रा
मथुरा के खरोट गांव निवासी 60 वर्षीय जयवती ने बताया कि बेटे की नौकरी के लिए भोलेनाथ से मन्नत मांगी थी, मन्नत पूरी होने पर कांवड़ यात्रा शुरू की। पिछले दो साल महामारी के कारण यात्रा स्थगित रही। शिव जी में अपार श्रद्धा है। भोलेनाथ ने हर बार मुराद सुनी है। पिछले सात साल से कांवड़ यात्रा कर रही हूं।
11वीं बार लेने जा रहे कांवड़
पलवल निवासी 75 वर्षीय सुग्रीव सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। वह पिछले 11 वर्षों से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। सुग्रीव के मुताबिक, 1998 में सड़क दुर्घटना में पैरों में काफी चोट आई थी। मन में शिव को याद किया और मन्नत मांगी की जल्द ठीक हो जाएं। इनके जीवन में चमत्कार हुआ और वह ठीक हुए। इसके बाद कांवड़ यात्रा शुरू की। शिव जी में आस्था और विश्वास है।
भोलेनाथ की कृपा से घर में धन धान्य
मथुरा निवासी 65 वर्षीय शकुंतला का कहना है कि उन्होंने जीवन में बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। मेहनत के साथ-साथ भोलेनाथ की आराधना भी की। आज मेहनत और भक्ति के कारण घर में धन-धान्य की कमी नहीं है। कभी रोटी के लिए मोहताज शकुंतला आज दूसरों का भी पेट भरती हैं। शकुंतला ने कहा कि जब तक पैरों में जान है, तब तक भोले की भक्ति करती रहेंगी।