फरीदाबाद। संत राजिन्दर सिंह महाराज ने दशहरे के आध्यात्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अहंकार पर विजय का प्रतीक है। रामायण की कथा केवल बाहरी युद्ध नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले नेकी और बदी के संघर्ष को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि रावण अहंकार का प्रतीक है, जिसके कारण मनुष्य प्रभु से दूर हो जाता है। पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन और ध्यान-अभ्यास से अहंकार त्यागकर आत्मा का परमात्मा से मिलन संभव है। संवाद