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Faridabad News: कम पानी पीने से हो सकता किडनी में पथरी का खतरा

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अमर उजाला ब्यूरो
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फरीदाबाद। गर्मी में कम पानी पीने से व्यक्ति के किडनी में पथरी की शिकायत हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञों ने लोगों को खूब पानी पीने की सलाह दी है। गर्मी ने इस तरह की लापरवाही हानिकारक हो सकती है।
गर्मी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश रुकने के बाद अगस्त माह में 35 डिग्री तापमान पहुंचने के साथ ही एक बार फिर लोगों के पसीने छूटने लगे हैं। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रवीन मलिक ने बताया कि किडनी की समस्या सबसे बुरी बीमारी होती है। किडनी हमारी शरीर का एक ऐसा हिस्सा है, जिसके द्वारा हमारे शरीर से गंद निकलता है। गर्मी के महीने हमारी किडनी पर भारी पड़ते हैं। शरीर में पानी की कमी कमी होने और पसीना अधिक आने से किडनी में पथरी बन सकती है। निजी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2015 में इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी ने पर्याप्त पानी पीने की विश्व व्यापी मुहिम चलाई थी, जिससे की अधिक से अधिक लोगों को गर्मियों में पर्याप्त पानी पीने के लिए जागरूक किया जा सके। भारत में लोगों में अभी जागरुकता का अभाव है, इसे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पथरी के रोगियों की संख्या में 10-15 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मरीज भी बढ़ रहे हैं। तापमान बढ़ने से बुजुर्गों में प्रोस्टेट की समस्या भी हो रही है। उन्हें ज्यादा पानी पीने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर गर्मी और तेज हुई तो पथरी से ग्रसित रोगियों की संख्या में इजाफा हो सकता है। लोगों को प्रतिदिन 4 से 5 लीटर पानी पीने की सलाह दी गई है ताकि किडनी स्वस्थ रहे।
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ये बढ़ती है परेशानी

डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि तापमान अधिक होने से हमारा शरीर तेजी से पसीना निकालता है। पसीने के साथ काफी पानी बाहर निकल आता है। शरीर में साठ फीसदी पानी है। जब कोशिका में 30 फीसदी तक पानी कम हो जाता है तो डिहाइड्रेशन की शिकायत हो जाती है। पानी की कमी पूरी करने के लिए हमारा शरीर पेशाब की सांद्रता बढ़ाता है यानी मूत्र में पानी कम होकर वह अधिक अम्लीय प्रकृति का हो जाता है। पेशाब गाढ़ा होने के साथ शरीर में मौजूद लवण का अवक्षेपण होने लगता है। इनके चलते ऑक्सजलेट, फॉस्फेट, यूरेट, यूरिक एसिड और अमीनो एसिड के छोटे-छोटे कण किडनी में इकठ्ठा होकर पथरी के रूप में संग्रहित हो जाते हैं। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को यूरीनरी इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है।
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