नूंह में फैली सांप्रदायिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग को लेकर शुक्रवार को विभिन्न मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना हैं कि 31 जुलाई को मेवात में हुई सांप्रदायिक हिंसा से लोगों में भय और डर का वातावरण बना हुआ है।
संगठनों का कहना है कि कि पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश में धार्मिक जुलूसों को सांप्रदायिकता का रंग देखकर आक्रामकता के साथ निकाला जाता है। ऐसे जुलूसों में खुलेआम हथियार लहराए जाते हैं। गंदी वीडियो डालकर लोगों को भड़काया जाता है। इन सब की परिणीति नूंह में फैले सांप्रदायिक दंगों की शक्ल में देखी जा सकती है। इसके लिए सरकार से मांग करते हैं कि दोनों समुदायों को भरोसे में लेकर हिंसा के बाद बने हालातों को सामान्य करने को प्राथमिकता देने का कार्य करें।
इसके अलावा घटना को भड़काने वाले दंगाई तत्वों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए। नूंह की घटना के सबसे मुख्य जिम्मेदार मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी हैं। इनके साथ-साथ कई और असामाजिक तत्व भी गंभीर अपराधों में लिप्त रहे हैं। अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए। भविष्य में ऐसे तमाम धार्मिक जुलूसों पर रोक लगाई जाए। हथियार लहराने और भड़काऊ भाषण देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। इसके अलावा नूंह के साथ साथ सोहना, पलवल, होडल, गुरुग्राम, फरीदाबाद, में हुई जान-माल की क्षति पूर्ति हेतु सरकार पीड़ित परिवारों को मुआवजा प्रदान करें।
ज्ञापन देने वालों में ज्वाइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल के संयोजक वीरेंद्र सिंह डंगवाल, आरएन सिंह, हुकमचंद वैनीवाल, आरडी यादव, निरन्तर पराशर, करतार सिंह जागलान, रघुवर दयाल, संजय मौर्य, रामफल जांगड़ा, मीना कनौजिया, सुमन जांगड़ा व दीपक आदि मौजूद रहे।