आरोपी पक्ष की महिलाएं तो अपने घर लौटीं पर गांव में नहीं जला चूल्हा
पलवली सामूहिक हत्याकांड
फरीदाबाद। पलवली गांव में एक ही रात में पांच लोगों की सामूहिक हत्या के करीब तीन माह बाद मंगलवार को भारी पुलिस बल के साए में आरोपी पक्ष की 10-12 महिलाएं गांव में लौटीं। लेकिन, उन्हें देखकर शाम को गांव के कई घरों में चूल्हा ही नहीं जलाया गया। फिर भी गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि किसी तरह का विरोध अथवा हंगामा न हो।
ग्रामीणों ने रविवार को पलवली गांव में सर्व समाज की पंचायत कर आरोपियों के परिजनों की घर वापसी का विरोध जताया था और प्रशासन तथा समाज से मांग की थी कि जब तक मामले का फैसला नहीं आ जाता है तब तक उन्हें गांव में न आने दें। इस मामले को लेकर गांव में कई बार पंचायत हो चुकी है और समाज आरोपियों के परिवार का बहिष्कार कर चुका है। इस दौरान मौके पर मौजूद डीसीपी ने लोगों को शांति बनाए रखने के साथ किसी तरह की कोई शरारत नहीं करने की चेतावनी दी है।
पलवली में 17 सितंबर 2017 की शाम सरपंच पति वीरेंद्र उर्फ बिल्लू के बेटे मिरिंडा और चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रहे बिजेंद्र के समर्थक कन्हैया के बीच झगड़ा हो गया था। चुनावी रंजिशें ताजा हो गईं और दोनों पक्ष आमने सामने आ गए थे। कुछ देर में बिल्लू परिवार की ओर से राइफल बंदूक आदि लेकर लोग आ गए। बिल्लू पक्ष की ओर से की गई गोलीबारी में श्रीचंद, राजेंद्र, ईश्वर, नवीन और देवेंद्र की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस सामूहिक हत्याकांड में पलवली की तत्कालीन सरपंच दयावती, उनके पति पूर्व सरपंच बिल्लू, गुरुग्राम पुलिस में तैनात एएसआई धर्मेंद्र समेत 28 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और इस मामले में अदालत में चार्जशीट भी दाखिल हो गई है। इसमें अब अगली तारीख दो जनवरी 2018 लगी है। बहरहाल, आरोपी पक्ष की महिलाओं को पुलिस के पहरे में गांव में पहुंचाया गया है। शांति बनाये रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है।
‘अदालत में मामला विचाराधीन होने तक गांव में न आएं’
रविवार को गांव में हुई पंचायत में स्थानीय निवासी बिजेंद्र शर्मा और राजकुमार शर्मा ने कहा था कि जब तक यह मामला अदालत में विचाराधीन है तब तक आरोपी पक्ष के परिजनों को गांव में नहीं आने दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष के परिजनों के गांव में आने से माहौल बिगड़ेगा। आरोपियों के परिजन कोई भी बखेड़ा खड़ा कर सकते हैं। उनका आरोप है कि महिलाएं गांव का माहौल खराब करने आई हैं लेकिन उन्हें इस मकसद में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सुरेंद्र शर्मा बबली ने कहा कि गांव में बड़ा और वीभत्स हत्याकांड हुआ था जिसमें पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसलिए बिरादरी की सर्वसम्मति से पंचायत ने यह फैसला लिया था कि आरोपी पक्ष को गांव में लाकर माहौल खराब न किया जाए और उनको दिल्ली स्थित उनके पैतृक गांव में रखा जाए। वे जल्द ही ग्रामीणों से बातचीत कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
गांव में फिर छाया रहा मातम
स्थानीय निवासी बिजेंद्र शर्मा ने बताया कि आरोपी पक्ष की महिलाएं दोपहर बाद पुलिस के साथ गांव में पहुंची हैं। इसके बाद से गांव में मातम का सा माहौल है। आरोपियों की महिलाओं को देखकर तीन माह पुरानी घटना का भयावह मंजर एक बार फिर सभी की आंखों में सामने तैर गया। हर कोई हैरान व परेशान है और शाम को गांव में किसी के घर में चूल्हा नहीं जला है। सभी गांव में एक जगह जमा हैं और गांव में शांति की कामना कर रहे हैं।
कोट
जिन्होंने इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया, वे जेल में हैं। उनके परिजनों को अपने गांव व घर में रहने का अधिकार है। पुलिस या ग्रामीण उन्हें यहां रहने से नहीं रोक सकते। इसलिए ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे भी गांव में शांति से रहें और उन्हें भी रहने दें। गांव में किसी भी तरफ से शांति भंग करने का प्रयास किया गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- भूपेंद्र सिंह, डीसीपी, सेंट्रल