चेयरमैन की हत्या के लिए ली थी 25 लाख रुपये की सुपारी
क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा गैंगस्टर बिजेंद्र ने गाजियाबाद में एक चेयरमैन की हत्या के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी ले रखी थी। इसके लिए वह एक माह तक गाजियाबाद में रहा और पूरी रैकी करके हत्या की पूरी प्लानिंग तैयार कर ली थी। मगर अभी सुपारी देने वाले की तरफ से हरी झंडी नहीं मिल पाने के कारण बिजेंद्र रुक गया था। साथ ही बिजेंद्र अपने पुराने साथी मनोज नचौली की हत्या की फिराक में घूम रहा था।
रिमांड के दौरान पूछताछ में बिजेंद्र ने बताया कि दीवाली पर हत्या की दो वारदात करने के बाद जब वह छिप कर घूम रहा था, उस दौरान उसका संपर्क गाजियाबाद के एक पंडित नामक व्यक्ति से हुआ। पंडित ने उसे गाजियाबाद के एक चेयरमैन को मारने के लिए सुपारी दी थी। 25 लाख रुपये में सौदा तय हो गया था। इस दौरान वह करीब एक माह तक गाजियाबाद में रहा और चेयरमैन की रैकी भी की और पूरी फिल्डिंग सेट कर ली थी। मगर अचानक पंडित ने बिजेंद्र को फिलहाल रोक दिया था। बिजेंद्र के अनुसार पंडित सुपारी की रकम नहीं जुटा पाया था और अपनी जमीन बेचने की तैयारी कर रहा था। इस लिए रुक गया था।
बिजेंद्र अपने पुराने साथी मनोज नचौली से भी बदला लेने के लिए उसकी हत्या करने की फिराक में घूम रहा था। पुलिस के अनुसार मनोज के साथ काम करते हुए बिजेंद्र ने कांवरा के सरपंच पर हमला कर उसकी टांगे तोड़ दी थी। इस मामले में मनोज ने बिजेंद्र से कहा था कि यह उसकी इज्जत का मामला है और वह यह काम कर दें। मगर बाद में बिजेंद्र को पता चला कि मनोज ने इसमें रुपये लिए थे और उसके हिस्से की रकम हड़प गया है। इसको लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था और बिजेंद्र उसके गैंग से अलग हो गया। उसके बाद से बिजेंद्र मनोज नचौली और उसके भाई कुलभूषण से रंजिश रखे हुए थे और उनकी हत्या करने की फिराक में घूम रहा था। पुलिस के अनुसार वह फरीदाबाद में इसी चक्कर में आया था और पकड़ा गया।
मामा के लड़के ने धकेला अपराध के दलदल में
एएसआई नरेंद्र ने बताया कि बिजेंद्र पढ़ाई में कमजोर था और दसवीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। इस दौरान वह गुरुग्राम में शराब का धंधा करने लगा। गांव चक्रपुर, गुरुग्राम में उसके मामा का लड़के मुकेश रहता था। मुकेश के संपर्क में आने पर वह भी उसके साथ रहने लगा। मुकेश बंटी फौजी गिरोह में था और वह ही बिजेंद्र को फौजी गिरोह में लेकर आया था। मुकेश को 2008 में दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। बंटी फौजी और मुकेश के एनकाउंटर के बाद वह भी गिरोह छोड़कर मनोज नचौली के गैंग में आ गया था। मगर उसके साथ भी झगड़ा होने के बाद अब बिजेंद्र अपना गिरोह तैयार कर रहा था, जिसमें उसने अपने साथ आरिफ और शुभू को शामिल कर लिया था।