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लीड, पेज तीन लिपिकों की हड़ताल : प्रॉपर्टी आईडी संबंधित नौ हजार शिकायतें लंबित

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हड़ताल के दौरान करीब चार हजार शिकायतें मिलीं, इधर-उधर परेशान फिर रहे लोग
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तीन फोटो

अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। लिपिकों की हड़ताल से नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी सुधार का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। इससे संबंधित करीब नौ हजार शिकायतें लंबित हैं। इसमें से करीब चार हजार शिकायतें हड़ताल के दौरान मिलीं हैं। लोगों को प्रॉपर्टी आईडी ठीक कराने के लिए इधर-उधर धक्के खाने पड़ रहे हैं।
नगर निगम समेत अन्य विभागों के क्लर्क सेक्टर 12 लघु सचिवालय पर अपनी मांगों को लेकर 20 दिन से धरना दे रहे हैं। इसमें नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी से संबंधित काम प्रभावित हो रहा है। निगम का प्रयास हैं कि प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटियों को जल्द दूर किया जाए लेकिन हड़ताल के दौरान ही चार हजार शिकायतें और बढ़ गईं हैं। अब इसे लेकर करीब नौ हजार शिकायतें लंबित है। लोगों को प्रॉपर्टी आईडी ठीक कराने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं देेने वाला है। जेडटीओ पदम सिंह ने बताया कि क्लर्क के हड़ताल से प्रॉपर्टी सुधार का कार्य धीमा हुआ है। कुछ कार्य अन्य कर्मचारियों की मदद से कार्य कराया जा रहा है।
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मेकर स्तर पर ही 7,800 शिकायतें लंबित
नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी नई बनाने या सुधार कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद आवेदन क्लर्क यानि मेकर स्तर पर पहुंचता है। क्लर्क की ओर से कागजातों की जांच की जाती है। यदि कोई कमी रहती हैं तो आवेदन को वापस कर कमी को दूर करने को कहा जाता है। यदि कोई कमी नही हैं तो फाइल चेकर यानि जेडटीओ के पास जाती है। जेडटीओ की मंजूरी के बाद आईडी बनाने की प्रक्रिया 90 फीसदी पूरी हो जाती है। इसके बाद निगम आयुक्त या संबंधित अधिकारी की मंजूरी के बाद आईडी बनाने या कमियों को दूर करने का काम किया जाता है। बता दें कि नगर निगम क्षेत्र में याशी कंपनी की ओर से 5.75 लाख प्रॉपर्टी आईडी बनाई हैं, इनमें त्रुटियों की भरमार है। लोगों के नाम, पता और प्लॉट के साइज समेत अन्य प्रकार की त्रुटियां है।
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आवासीय भवन प्रॉपर्टी आईडी में कामर्शियल हो गया है। इसे ठीक कराने के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी ठीक नहीं हुआ है। दो माह से परेशान हूं।
- राज कुमारी, एनआईटी

प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटि ठीक कराने के लिए आवेदन किया है। हड़ताल के कारण काम में देरी हो रही है। इससे निगम का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
- महेश, एनआईटी
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