उद्योगों के गंदे पानी को शोधित करने के लिए बनेंगे सीईटीपी
एचएसआईआईडीसी बनवाएगा तीन सीईटीपी, निगम से मांगी जगह
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक इकाईयों के गंदे पानी को शोधित करने के लिए तीन सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट)अब एचएचआईआईडीसी बनवाएगा। एचएसआईआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन) ने नगर निगम से जमीन मांगी है। निगम ने एक संयंत्र के लिए बादशाहपुर गांव में जमीन दी है।
जिले में करीब 28 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां है। इसके अलावा काफी बगैर पंजीकृत इकाईयां भी हैं। औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने में घरेलू सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) पूरी तरह से कारगर नहीं हैं। वहीं, जिले में डाई यूनिटें, केमिकल फैक्ट्रियां व एल्युमिनियम की कंपनियां भी हैं। एक सर्वे के अनुसार फरीदाबाद की कंपनियों से करीब 66 एमएलडी गंदा पानी रोज निकलता है। इस पानी को साफ करने के लिए समुचित इंतजाम नहीं है। इससे यमुना नदी का पानी दूषित होता है। इसके लिए नगर निगम तीन संयंत्र लगवाने की योजना तैयार की थी। इसमें बादशाहपुर में 15 एमएलडी, मिर्जापुर में 25 और प्रतापगढ़ गांव 50 एमएलडी का संयंत्र बनाया जाना है।
इस पर अब एचएसआईआईडीसी काम कर रहा है। तीनों संयंत्रों के लिए नगर निगम को जमीन देनी है। बादशाहपुर गांव में 15 एमएलडी के संयंत्र के लिए नगर निगम ने जमीन दी है। इस पर संयंत्र लगाने के लिए कमेटी ने कंसलटेंट के साथ हाल में मौका मुआयना किया था। इसमें पाया कि जमीन गांव के अंदर है और रास्ता सही नहीं हैं। संकरा रास्ता होने से वाहनों के जाने में परेशानी होगी। इस पर एचएसआईआईडीसी ने नगर निगम से दूसरी जमीन देने या रास्ता ठीक कराने को कहा है। जिससे संयंत्र लगाने के लिए सर्वे काम शुरू हो सके। एसई ओमवीर सिंह ने कहा कि इस पर काम चल रहा है। रास्ते की जांच कराई जा रही है। यदि अतिक्रमण होगा तो हटाया जाएगा।
यमुना का पानी हो रहा दूषित-
एनजीटी और प्रदूषण बोर्ड का सख्त निर्देश है कि यमुना नदी में शोधित पानी को ही डाला जाए लेकिन जरूरत के अनुसार एसटीपी नहीं होने से सैकड़ों लीटर पानी नालों के जरिए यमुना में गिर रहा है। उद्योगों का भी गंदा पानी चोरी छिपे नालों में डाल दिया जाता है। ऐसे में यमुना एक्शन प्लान के तहत विस्तृत कार्य योजना तैयार है। इसके तहत घरेलू और औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को 100 फीसदी शोधित करना है। अभी घरेलू सीवर करीब 259 एमएलडी पैदा होता है। बादशाहपुर में 45 एमएलडी, प्रतापगढ़ में 50 और मिर्जापुर गांव में 45 एमएलडी का एसटीपी हैं।