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फरीदाबाद: भंगड़ा के साथ चौपाल पर फ्यूजन डांस का तड़का

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कलाकारों ने स्नेह और भाईचारे का दिया संदेश
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अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला
जमकर झूमे पर्यटक, कलाकारों के साथ किया नृत्य, मेले के आठवें दिन दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ रही
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला अपनी पूरी रंगत पर पहुंच चुका हैं। मेले के आठवें दिन शनिवार को दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ रही। चाैपाल पर देश-विदेश से आए कलाकारों ने भंगड़ा के साथ फ्यूजन डांस का तड़का लगाया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्नेह और भाईचारे का संदेश दिया। शनिवार को चौपाल पर आर्मेनिया, नाइजीरिया, उज्बेकिस्तान, तंजानिया, सूडान और युगांडा के कलाकारों के अलावा हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर और पंजाब के कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुति दी। हरियाणा और पंजाब के कलाकारों के धमाल पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ जोरदार स्वागत किया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्नेह और भाईचारे का संदेश दिया।

वेलेंटाइन सप्ताह की चौपाल देखने को मिली झलक

बड़ी चौपाल पर शनिवार को वेलेंटाइन सप्ताह की झलक देखने को मिली। आर्मेनिया के कलाकारों ने अपने देश की संस्कृति की झलक बिखेरते हुए युवक-युवती के प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं को डांस के माध्यम से पेश किया। संयुक्त अरब अमीरात के कलाकारों ने समृद्ध संस्कृति की झलक बिखेरते हुए समूह नृत्य प्रस्तुत किया। पुरुष कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की वाहवाही लूटी।
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नृत्य के माध्यम आजादी की खुशी मनाई
घाना के कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से अपनी परंपराओं, संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इन कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से देश की आजादी की खुशी का भी इजहार किया। नाइजीरिया के कलाकारों ने नृत्यावली के जरिये दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। यह नृत्य नाइजीरिया का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। मिजोरम के कलाकारों ने वहां के प्रसिद्ध नृत्य के माध्यम से अच्छी फसल उत्पादन पर खुशी का इजहार किया। दर्शक इन देशी-विदेशी कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों का खूब आनंद ले रहे हैं।

प्रकाश नाथ सुंदर वाद्य यंत्रों की धुन से कर रहे पर्यटकों को आकर्षित

हरियाणा के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में परंपरागत वाद्य यंत्रों के साथ पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। छोटी-बड़ी चौपालों के अलावा मेला के विभिन्न कोनों में स्थानीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा पर्यटकों का मनोरंजन कर रहे हैं। पर्यटक भी पारंपरिक वाद्य यंत्रों की सुरीली धुनों पर थिरक रहे हैं। पानीपत के वजीरपुर-टिटाना निवासी 68 वर्षीय प्रकाश नाथ साथी कलाकारों के साथ गुरु गोरखनाथ व कानीपानाथ प्रणाली को आगे बढ़ाते हुए लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। प्रकाश नाथ ऐसे कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अब तक आयोजित सभी हस्तशिल्प मेलों में हरियाणा की संस्कृति के ध्वज वाहक बन रहे हैं। सन 1987 से शुरू हुए सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला में भी प्रकाश नाथ की बीन पार्टी के अलावा नगाड़ा व बंचारी की पार्टी ने भी शिरकत की थी। वह अपनी खानदानी (सपेरा/जोगीनाथ बीन) परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रकाश नाथ का कहना है कि उन्होंने युवाओं की पसंद पर ढोल वाद्य यंत्र को शामिल किया है, वे पहले बीन पर लहरा की प्रस्तुति देते थे।

जोहान्सबर्ग के उत्पाद पर्यटकों को कर रहे आकर्षित
बड़ी चौपाल के पास दक्षिण अफ्रीका के शिल्पकारों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर विशेषकर महिला पर्यटकों की दिनभर चहलकदमी दिखी। स्टॉल संख्या एफसी-37 पर जोहान्सबर्ग से आए शिल्पकारों और बुनकरों ने बेहतरीन उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। यहां पत्थर, लकड़ी और कपड़े से बनी वस्तुओं पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। इन उत्पादों में बैग के अलावा महिलाओं के पारंपरिक आभूषण और अन्य कृतियां भी शामिल हैं जो एक विशेष संदेश के साथ बनाई गई हैं। इस स्टॉल पर एक परिवार की मनोहारी कृति भी प्रदर्शित है, जो एकता का संदेश दे रही है।
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मोटा अनाज के प्रति लोगों में फैला रहे जागरुकता
मिलेट मैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर पद्मश्री डॉ. खादर वली ने खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त के साथ मेले में हरियाणा मिलेट पवेलियन स्थापित किया। जिसका मकसद है मोटा अनाज के प्रति लोगों में जागरुक करना है। इसमें प्रदर्शनी, किसान सलाह केंद्र, मिलेट कुकिंग कक्षाएं, महिलाओं के लिए मोटे अनाज के भोजन बनाने के लिए विशेष सलाह एवं समाधान हेल्प डेस्क लगाई गई है। मेले के लिए राम बाबू

विशेषकर हैदराबाद से आए हैं। रामबाबू के मार्गदर्शन में दर्जनों स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा रहे हैं, जो खेती विरासत मिशन के स्टॉल पर उपलब्ध हैं।
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