फरीदाबाद। दुर्लभ सर्जरी के बाद 63 वर्षीय नरेंद्र दस साल बाद अपने पैरों पर चल सके। नरेंद्र ने हाल ही में सर्वोदय अस्पताल में घुटनों और वैस्कुलर बाईपास सर्जरी एक साथ कराई। इसके बाद ही उनका दोबारा चलना-फिरना शुरू हो पाया है। अस्पताल के डॉ. सुजॉय व डॉ. सुमित ने बताया कि केस स्टडी से पता चला कि यह अपने तरह की अनोखा ऑपरेशन है, जो पहले नहीं हुआ। इसलिए इस केस को लिम्का बुक व गिनीज बुक रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी है। वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी व वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुमित नारंग ने बताया कि नरेंद्र का दस वर्ष पहले एक एक्सीडेंट हुआ था। इस दौरान उसने सीधे पैर की सर्जरी कराई थी। ऑपरेशन में कुछ खामी के कारण उसके पैर की आर्टरी (रक्त वाहिका) में थक्का जम गया। इससे उसके पैर धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गए। उसने तब से चलना फिरना छोड़ दिया था। नरेंद्र की हालत देखकर उसके इलाज के लिए डॉ. सुजॉय व डॉ. नारंग ने संभावना पर विचार किया। निर्णय लिया गया कि एक ही बार में दो ऑपरेशन कर प्रयास किया जा सकता है। पहले वैस्कुलर बाईपास सर्जरी और फिर घुटना प्रत्यारोपण एक ही समय पर किया गया। ऑपरेशन के दौरान बाएं पैर से स्वस्थ नस लेकर दाएं पैर में ब्लॉक नस की जगह प्रत्यारोपित की गई। इससे दोनों पैरों में रक्त प्रवाह शुरू हुआ। कंप्यूटर नेविगेशन तकनीक की मदद से उसके दाएं घुटने का भी प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के दूसरे दिन ही मरीज ने चलना शुरू कर दिया। सर्वोदय के चेयरमैन डॉ. राकेश ने डॉक्टरों की टीम को सफल ऑपरेशन व मरीज को हौसला बनाए रखने के लिए बधाई दी।