सीजीएसटी जांच में 28 फर्जी कंपनियों का खुलासा
पिछले दिनों नोएडा में मिली फर्जी के कंपनियों के साथ विभाग ने की थी जांच शुरू
सभी 28 कंपनियां दिल्ली की कंपनियों से फर्जी बिलों के आधार पर कर रही खरीद-फरोख्त
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) आयुक्तालय की टीम ने 28 फर्जी कंपनियों का खुलासा किया है। यह कंपनियां फर्जी बिलों के आधार पर सामान की खरीद-फरोख्त कर सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ ले रही थीं। इस दौरान कंपनियों ने आईटीसी के नाम पर सरकार को करीब 45 करोड़ के राजस्व को नुकसान पहुंचाया है। कंपनियों को सील कर मालिकों की तलाश की जा रही है।
पिछले माह नोएडा पुलिस ने जालसाजों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था जो फर्जी कंपनियां बनाकर जालसाजी कर जीएसटी रिटर्न क्लेम करते थे। पकड़े गए आरोपी फर्म का फर्जी बिल बनाते थे और जीएसटी रिफंड (इनपुट टैक्स क्रेडिट) प्राप्त कर सरकार को चूना लगाते थे। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 2660 फर्जी कंपनियां मिली हैं। इनमें 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बीते 4.5 साल में आरोपियों ने जीएसटी रिफंड लिया है।
सीजीएसटी फरीदाबाद आयुक्तालय की एंटी इवेजन ब्रांच की ओर से शहर के अलग-अलग इलाकों में जांच की गई। इस दौरान 28 कंपनियां फर्जी पाई गईं। इनमें 14 फरीदाबाद में जबकि अन्य दिल्ली में हैं। जिनसे जिले की कंपनियां सामान की खरीद-फरोख्त करती थीं। टीम ने मौके पर जांच तो पता चला कि वह दूसरों के कागजात पर चल रही थीं। वहीं, कुछ जगह कंपनी प्लाॅट पाए गए, हालांकि नोएडा के मुकाबले फर्जी कंपनियां शहर में मिलने का आंकड़ा बेहद कम है।
एंटी इवेजन ब्रांच के अपर आयुक्त राजेश कुमार ने बताया कि किन्ही कारणों से टैक्स का कलेक्शन पहले कम होता था, लेकिन साल 2022-23 में टारगेट से भी ज्यादा सीजीएसटी कलेक्शन प्राप्त होने की वजह पिछले डेढ़ सालों से एंटी इवेजन ब्रांच का सक्रिय होना भी है। जिले में जो व्यापारी जीएसटी की चोरी कर रहे थे। उन पर शिकंजा कसा गया, जिससे वह टैक्स जमा कराएं। इससे रिकवरी में इजाफा हुआ है। जांच में फर्जी पाई गई कंपनियों की जांच जारी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए धरपकड़ अभियान चलाया जा रहा है।