कैंसर की बीमारी से पीड़ितों के साथ आरोपी खिलवाड़ कर रहे थे। आरोपी कैंसर मरीज की कीमोथेरेपी में काम करने वाले 1.97 लाख रुपये के इंजेक्शन में 100 रुपये की कीमत वाली एंटी फंगस दवाई भर कर बेचते थे। ऐसे में ये इंजेक्शन मरीज की जिंदगी नहीं बचा पाता था। ये फार्मासिस्ट को 50 फीसदी कम कीमत पर इंजेक्शन देते थे।
अपराध शाखा के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये दो वर्ष से कैंसर का नकली इंजेक्शन बना रहे थे। शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि ये अभी तक बाजार में पांच से सात हजार इंजेक्शन खपा चुके हैं। आरोपी दिल्ली, मुंबई, पूणे, मुजफ्फरपुर-बिहार में इस नकली इंजेक्शन की ज्यादा सप्लाई करते थे।
मुजफ्फरपुर बिहार का आदित्य फार्मा पूरे देश के अलावा चीन व अमेरिका में भी सप्लाई कर रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रोहिणी स्थित कैंसर के प्राइवेट अस्पताल के कर्मचारी कोमल तिवारी और अभिनय कोहली अस्पताल में इंजेक्शन की खाली शीशियों को एकत्रित कर लेते थे। इसके बाद ये उन्हें आरोपियों को दे देते थे।
आरोपी इनमें एंटी फंगस दवाई भर देते थे। इसके एवज में अस्पताल के एक कर्मचारी को एक शीशी देने पर छह से सात हजार रुपये मिलते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभी दबिश चल रही हैं और भारी मात्रा में नकदी व नकली इंजेक्शन बरामद होने की पूरी संभावना है।