संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कितनी तारीखें, दिन, हफ्ते, महीने, साल बदल गए, मौसम, ठंड से गर्म होने लगा है, लेकिन पूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) मामले पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते वह आज तक आंदोलन करने को मजबूर हैं। यह वीर पूर्व सैनिक चट्टान की तरह अपनी मांगों को लेकर डटे हैं। जंतर-मंतर पर पूर्व सैनिकों का यह आंदोलन 15 जून 2015 को शुरू हुआ था। पूर्व सैनिक ओमकार कटियार ने बताया कि वह लोग लगभग साढ़े दस सालों से धरने में बैठे है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति की तारीख की परवाह किए बिना समान रैंक पर समान पेंशन मिले। उन्होंने बताया कि 2015 में सरकार ने ओआरओपी लागू किया था, लेकिन इसमें कई विसंगतियां हैं जैसे पेंशन संशोधन हर पांच साल में होने के बजाय तुरंत हो। आंदोलन 3,901 दिनों बाद भी जारी है।