उत्तम नगर में करोड़ों की एक प्रॉपर्टी को लेकर प्रदीप सोलंकी और प्रवीण गहलोत के बीच विवाद हो गया था। विवाद इस स्तर पर बढ़ गया कि जेल में बंद प्रदीप सोलंकी ने प्रवीण की हत्या करने की साजिश रच डाली। प्रवीण की हत्या के लिए उसने अपने सबसे विश्वासपात्र विकास दलाल को जिम्मेदारी दी। प्रदीप ने पूरे मामले की देखभाल की जिम्मेदारी गोपाल किशन को दी। उसे निर्देश दिया गया कि वह प्रवीण के बारे में सारी जानकारी विकास दलाल को मुहैया करवाए और विकास प्रवीण की हत्या करने में नाकाम होता है तो वह उसकी हत्या कर दे।
वारदात वाले दिन गोपाल किशन प्रवीण की कार के पीछे अपनी बाइक पर मौजूद था और प्रवीण की सारी जानकारी विकास को दे रहा था। गोपाल ने ही प्रवीण के द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन की ओर आने की जानकारी विकास को दी थी, जहां पहुंचकर विकास ने अपने दो सहयोगियों अंकित डबास और चीता के साथ वारदात को अंजाम दिया।