ग्रेटर कैलास में दुर्गाबाड़ी पूजा समिति के सभी सदस्य
- फोटो : भूपिंदर सिंह
ग्रेटर कैलाश-एक में आदिवासी कला की थीम पर दुर्गा पूजा पंडाल को संवारा गया है। यहां मां दुर्गा की सात फुट ऊंची मनमोहक मूर्ति स्थापित की गई है। तीन दिन से बंगाली परंपरा के मुताबिक विधिविधान से आदिशक्ति की पूजा हो रही है। यहां आधी रात तक उत्सव चल रहा है। इस दौरान महिलाएं धुनुची नृत्य करती हैं। सात खास व्यंजनों वाले प्रसाद मिलते हैं। प्रसाद का मैन्यू हर दिन बदल जाता है।
ग्रेटर कैलाश-एक में दुर्गाबाड़ी पूजा समिति ने भव्य तरीके से दुर्गा पूजा उत्सव आयोजित किया है। बंगाल और ओडिशा के आदिवासी समुदाय की पारंपरिक कला के इस्तेमाल से पूरे पंडाल को संवारा गया है। पंडाल की दीवारें अपने में प्रकृति को समेटे मन को सुकून देती हैं। इन पर फूल-पत्तियों के चित्र आदिवासी कला के उपयोग से बनाए गए हैं। पूजा पंडाल का मुख्य द्वार कालीघाट के पारंपरिक पट्टचित्र शैली में सुसज्जित है। पंडाल की ऊंचाई करीब 12 फुट है। लाइटिंग से इसकी शोभा देखते बनती है। सुबह शाम घंटे-घड़ियाल की धुन, धूप-दीप, नैवेद्य की आरती और भजनों से वातावरण भक्तिमय है।
बंगाल जैसी ग्रेटर कैलाश की दुर्गा पूजा
पूजा समिति की कोषाध्यक्ष एना पाठक ने बताया कि पांच हजार लोगों के लिए हर दिन प्रसाद बनता है। ढोकर दालना, मिश्रित सब्जियां, पापड़, पुलाव, आम चटनी और बैंगन के पकौड़े के अलावा संदेश और राजभोग जैसे मिष्ठान प्रसाद के रूप में मिलते हैं। ग्रेटर कैलाश की यह दुर्गापूजा बंगाल की दुर्गापूजा का एहसास करा रही है।