पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-एक स्थित अग्रवाल मेडिकल सेंटर में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर घरेलू सहायिका व लैब टेक्नीशियन ऑपरेशन कर रहे थे। आरोपी हर तरह का ऑपरेशन करते थे। ऐसे में सेंटर में लापरवाही से 20 से ज्यादा लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस को अभी तक सेंटर के खिलाफ नौ शिकायतें मिल चुकी हैं। इनमें से दो शिकायतों पर एफआईआर हो चुकी है। आरोपी सस्ते इलाज का झांसा देकर सेंटर में बुलाते थे। पुलिस ने मंगलवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया।
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने बताया, ग्रेटर कैलाश-एक थाने की पुलिस ने सेंटर के मालिक डाॅ. नीरज अग्रवाल (एमबीबीएस), पत्नी पूजा अग्रवाल (पहले घरेलू सहायिका), महेंद्र सिंह (लैब टेक्नीशियन) और डॉ. जसप्रीत सिंह (एमएस, सर्जन) को गिरफ्तार किया है। डॉ. जसप्रीत सर्जरी के नकली कागजात तैयार करता था।
रतिया मार्ग, संगम विहार निवासी महिला ने पति असगर अली को पित्त की थैली में पथरी की सर्जरी के लिए अग्रवाल मेडिकल सेंटर में 10 अक्तूबर, 2022 को भर्ती कराया था। नीरज अग्रवाल ने पीड़ित से कहा था कि सर्जरी प्रसिद्ध सर्जन डॉ. जसप्रीत सिंह करेंगे। फिर सर्जरी से कुछ देर पहले नीरज ने बताया कि किसी वजह से जसप्रीत नहीं आ सके इसलिए अब महेंद्र सिंह व पूजा सर्जरी करेंगे। नरेश ने असगर को दोनों कथित डॉक्टरों से मिलवाया।
उसी समय पूजा ने नर्स को असगर का बीपी मापने को भी कहा। इसके बाद महेंद्र, नीरज और पूजा ने असगर की सर्जरी कर दी। बाद में पीड़ितों को पता चला कि महेंद्र व पूजा डॉक्टर नहीं हैं। असगर को ऑपरेशन थिएटर के बाहर लाया गया तो वह तेज दर्द की शिकायत करने लगा। बाद में उसे सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद पीड़िता की शिकायत पर ग्रेटर कैलाश एक थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
असगर की अधिक खून बहने से मौत हुई थी
पुलिस को एम्स से असगर अली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो पता लगा कि ऑपरेशन के दौरान अधिक खून बह गया था। इस कारण उसकी मौत हुई थी। इसके बाद इंस्पेक्टर अजीत सिंह की टीम ने अग्रवाल मेडिकल सेंटर के मालिक डॉ. नीरज अग्रवाल, पत्नी पूजा, महेंद्र और डॉ. जसप्रीत को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
खाली पर्चियों पर डॉक्टर के हस्ताक्षर
तलाशी में आरोपियों के घर से 414 दवा पर्चियां मिली जिनमें ऊपर खाली जगह छोड़ने के बाद नीचे डॉक्टर के हस्ताक्षर थे। इसके अलावा दो रजिस्टर मिले जिनमें उन मरीजों का विवरण है जिनका मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) सेंटर में करवाया गया था। कई प्रतिबंधित दवाए, कई इंजेक्शन जो अस्पताल के अलावा अन्य स्टोर में नहीं होने चाहिए थे, एक्स्पायर सर्जिकल ब्लेड, विभिन्न रोगियों की मूल पर्चियां, 47 विभिन्न बैंकों की चेक बुक, 54 एटीएम कार्ड, डाकघरों की पासबुक और 6 पीओएस टर्मिनल क्रेडिट कार्ड मशीनें भी तलाशी में मिलीं।