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डॉक्टरों का करिश्मा: नई तकनीक से 25 मिनट में जोड़ी रीढ़, स्टेंट को वर्टेब्रल बॉडी के अंदर डाल लगाते हैं सीमेंट

Thu, 01 Jun 2023 11:04 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

वर्टेब्रा स्टेंटोप्लास्टी नामक इस तकनीक में दिल के इलाज में जैसे स्टेंट डालते हैं, उसी तरह वर्टेब्रल स्टेंटोप्लास्टी को भी लोकल एनेस्थिसिया के साथ किया जाता है। इस प्रक्रिया में टाइटेनियम से बने और आकार में बड़े किए जा सकने वाले केज को फ्रैक्चर हुए वर्टेब्रा के भीतर डाला जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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बिहार निवासी 65 वर्षीय महिला की रीढ़ की हड्डी में हुए फ्रैक्चर को नई तकनीक से डॉक्टरों ने महज 25 मिनट में जोड़ दिया। वर्टेब्रा स्टेंटोप्लास्टी नामक इस तकनीक में दिल के इलाज में जैसे स्टेंट डालते हैं, उसी तरह वर्टेब्रल स्टेंटोप्लास्टी को भी लोकल एनेस्थिसिया के साथ किया जाता है। इस प्रक्रिया में टाइटेनियम से बने और आकार में बड़े किए जा सकने वाले केज को फ्रैक्चर हुए वर्टेब्रा के भीतर डाला जाता है। इसके बाद केज का आकार बढ़ जाता है और टूटी हुई हड्डी को हटा दिया जाता है। इसके साथ ही हाइट पहले जितनी हो जाती है। स्टेंट को भीतर ही छोड़ दिया जाता है और अंत में वर्टेब्रल बॉडी और स्टेंट में बोन सीमेंट भर दिया जाता है।

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एक निजी अस्पताल में बिहार निवासी 65 वर्षीय महिला आई थी। मरीज को पहले से ही ऑस्टियोपोरोसिस, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कोरोनरी आर्टरी व ऑस्टियोऑर्थराइटिस जैसी बीमारियां थीं जो सर्जरी करने के लिहाज से खतरे की वजह बन सकती थीं। ऐसे में दिल्ली के डॉक्टरों ने पहली बार वर्टेब्रा स्टेंटोप्लास्टी का इस्तेमाल करने का फैसला लिया।
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डॉक्टरों ने बताया कि अभी तक उत्तर भारत के किसी भी अस्पताल ने इस तकनीक पर काम नहीं किया है। अस्पताल में नई तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने 25 मिनट में हड्डी जोड़ दी। डॉक्टरों ने बताया कि स्टेंटोप्लास्टी एक क्रांतिकारी तकनीक है जिसमें स्टेंट को वर्टेब्रल बॉडी के भीतर डालकर सीमेंट लगाया जाता है। वर्टेब्रल फ्रैक्चर के मामले में गंभीर दर्द होने पर यह बहुत ही प्रभावी और जल्द असर करने वाला उपचार है।
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