एक निजी अस्पताल में बिहार निवासी 65 वर्षीय महिला आई थी। मरीज को पहले से ही ऑस्टियोपोरोसिस, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कोरोनरी आर्टरी व ऑस्टियोऑर्थराइटिस जैसी बीमारियां थीं जो सर्जरी करने के लिहाज से खतरे की वजह बन सकती थीं। ऐसे में दिल्ली के डॉक्टरों ने पहली बार वर्टेब्रा स्टेंटोप्लास्टी का इस्तेमाल करने का फैसला लिया।
डॉक्टरों ने बताया कि अभी तक उत्तर भारत के किसी भी अस्पताल ने इस तकनीक पर काम नहीं किया है। अस्पताल में नई तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने 25 मिनट में हड्डी जोड़ दी। डॉक्टरों ने बताया कि स्टेंटोप्लास्टी एक क्रांतिकारी तकनीक है जिसमें स्टेंट को वर्टेब्रल बॉडी के भीतर डालकर सीमेंट लगाया जाता है। वर्टेब्रल फ्रैक्चर के मामले में गंभीर दर्द होने पर यह बहुत ही प्रभावी और जल्द असर करने वाला उपचार है।