नई दिल्ली। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट (आईआईएसएसएम) के सीईओ प्रो. संतोष कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के सामने बढ़ती आपदाएं बड़ी चुनौती बन रही हैं। ओखला स्थित एनबीसीसी सेंटर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में उन्होंने बताया कि पहले एक दशक में एक बड़ी आपदा आती थी, जबकि अब हर वर्ष कई बड़ी आपदाएं सामने आ रही हैं।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के कारण देश को हर साल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग तीन प्रतिशत नुकसान होता है। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और सिंचाई जैसी विकास योजनाओं पर खर्च की जा सकती है। प्रो. कुमार ने कहा कि आपदा आने के बाद राहत कार्यों से अधिक जरूरी उसके जोखिम को कम करना और रोकथाम के उपायों को मजबूत करना है। उनके अनुसार सुरक्षा और बचाव पर किया गया निवेश भविष्य में बड़े नुकसान को रोक सकता है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा पर खर्च किया गया एक रुपया आपदा के समय करीब सात रुपये की बचत करा सकता है। इसलिए सरकार और संस्थानों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। संवाद