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दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम: कार से 130 गुना ज्यादा पीएम 2.5 छोड़ता है डीजल मालवाहक वाहन, लिया ये बड़ा फैसला

Sat, 22 Aug 2026 09:15 AM IST
अनुज कुमार धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सीएक्यूएम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने नए मालवाहक वाहनों के पंजीकरण को चरणबद्ध तरीके से स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने का फैसला किया है।
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प्रदूषण पर लगाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में हल्के मालवाहक वाहनों को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बीएस-6 डीजल एलजीवी एक बीएस-6 सीएनजी यात्री कार की तुलना में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले अति सूक्ष्मकणों- पीएम2.5 का 130 गुना से अधिक उत्सर्जन करता है। वहीं, बीएस-6 सीएनजी एलजीवी का पीएम2.5 उत्सर्जन समान श्रेणी की यात्री कार के मुकाबले 57 गुना से अधिक है। इसके बाद आयोग ने नए मालवाहक वाहनों के पंजीकरण को चरणबद्ध तरीके से स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने का फैसला किया है।
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एनसीआर के सक्रिय वाहन बेड़े में एलजीवी की हिस्सेदारी सिर्फ 1.2 फीसदी है, जबकि पीएम उत्सर्जन में इनका योगदान करीब 3.3 फीसदी है। दिल्ली में यह योगदान अनुमानित 5.1 फीसदी है। सीएक्यूएम के अनुसार, ई-कॉमर्स, कूरियर, लॉजिस्टिक्स, एफएमसीजी वितरण और शहरी माल ढुलाई में इनके बढ़ते इस्तेमाल के कारण कम संख्या के बावजूद इनका प्रदूषण प्रभाव अधिक है।

2027 से दिल्ली में नया डीजल-सीएनजी मालवाहक नहीं : सीएक्यूएम के आदेश के मुताबिक दिल्ली में 3.5 टन तक के एन1 श्रेणी के नए डीजल, पेट्रोल और सीएनजी मालवाहक वाहनों का पंजीकरण 1 जनवरी 2027 से बंद होगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में यह नियम 1 जुलाई 2027 से लागू होगा। 
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सीएनजी मालवाहकों पर रोक के फैसले की समीक्षा जरूरी
परिवहन विशेषज्ञ डॉ. अनिल छिकारा ने 2027 से बीएस-6 सीएनजी एलजीवी के नए पंजीकरण पर रोक की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि कई मालवाहक 300 किलोमीटर तक चलते हैं और भार व दूरी के लिहाज से फिलहाल सीएनजी के व्यावहारिक विकल्प सीमित हैं। 2025-26 में बड़ी संख्या में सीएनजी मालवाहक बिना किसी प्रोत्साहन के खरीदे गए। उनके मुताबिक ईवी को दूसरे विकल्प बंद करके नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक और परिचालन क्षमता के आधार पर बढ़ावा देना चाहिए। 

सबसे ज्यादा असर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर
फैसले का असर छोटे ट्रांसपोर्टरों और मालिक-चालकों पर अधिक पड़ सकता है। एक-दो वाहनों पर निर्भर कारोबारियों को वाहन बदलने पर इलेक्ट्रिक विकल्प अपनाना होगा। चुनौती इसलिए भी है क्योंकि एलजीवी केवल शहर के भीतर छोटी दूरी के लिए नहीं चलते, बल्कि मंडियों, दुकानों, ई-कॉमर्स, कुरियर और स्थानीय आपूर्ति के साथ लंबी दूरी की ढुलाई में भी इस्तेमाल होते हैं। एन1 श्रेणी में नौ कंपनियों के 20 इलेक्ट्रिक मॉडल उपलब्ध हैं, लेकिन एन2 में 2025 के दौरान एक भी इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत नहीं हुआ।
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