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दिल्ली: आईजीआई एयरपोर्ट के एयरसाइड में बन सकती हैं सुरंगें, विमान और सेवा वाहनों की आवाजाही आसान करने की कवायद

Fri, 28 Aug 2026 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा शनि पाथौली, नई दिल्ली

सार

एयरपोर्ट के एयरसाइड क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर सुरंग बनाने की व्यवहार्यता जांचने के लिए संरचनात्मक सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (आईजीआई) के अंदर विमानों से जुड़े सेवा वाहनों की आवाजाही को और सुगम बनाने के लिए कुछ मार्गों को जमीन के नीचे ले जाने की संभावना तलाशी जा रही है। एयरपोर्ट के एयरसाइड क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर सुरंग बनाने की व्यवहार्यता जांचने के लिए संरचनात्मक सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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एयरपोर्ट का एयरसाइड वह हिस्सा है, जहां विमान खड़े होते हैं और उनके आसपास विमानों से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां होती हैं। इस क्षेत्र में यात्रियों को विमान तक पहुंचाने वाली बसों के अलावा सामान पहुंचाने वाले वाहन, सफाई वाहन, तकनीकी और मरम्मत से जुड़े वाहन, सुरक्षा वाहनों सहित कई तरह के सेवा वाहन लगातार चलते रहते हैं। सलाहकार यह अध्ययन करेगा कि एयरपोर्ट के किन हिस्सों में सुरंग बनाई जा सकती है, वहां निर्माण कितना सुरक्षित रहेगा और इससे विमान संचालन तथा वाहनों की आवाजाही को कितना लाभ मिल सकता है।

कुछ रास्तों को जमीन के नीचे ले जाने की संभावना
प्रस्तावित योजना के तहत एयरपोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में देखा जाएगा कि क्या कुछ वाहन मार्गों को भूमिगत किया जा सकता है। तकनीकी अध्ययन में जमीन की स्थिति, उपलब्ध जगह, मौजूदा ढांचे और एयरपोर्ट की दूसरी सुविधाओं को ध्यान में रखा जाएगा। यदि किसी स्थान पर सुरंग बनाना उपयुक्त पाया जाता है तो भविष्य में वहां निर्माण की योजना तैयार की जा सकती है। हालांकि, अभी सुरंग बनाने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। फिलहाल केवल इसकी व्यवहार्यता और सुरक्षा की जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगा कि एयरसाइड में किन स्थानों पर सुरंग बनाई जा सकती है।
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एयरसाइड में वाहनों की आवाजाही होगी आसान
एयरसाइड क्षेत्र में एक साथ कई तरह के वाहन चलते हैं। विमान के उतरने के बाद उसे अगली उड़ान के लिए तैयार करने में कई सेवाओं की जरूरत होती है। यदि कुछ वाहन मार्गों को जमीन के नीचे ले जाना संभव हुआ तो सतह पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है। इससे सेवा वाहनों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में कम समय लग सकता है।

रनवे और टैक्सी-वे के नीचे निर्माण बड़ी चुनौती
एयरपोर्ट के अंदर सुरंग बनाना सामान्य सड़क के नीचे सुरंग बनाने से कहीं अधिक जटिल होगा। एयरपोर्ट में रनवे, टैक्सी-वे और विमान खड़े करने के स्थान लगातार महत्वपूर्ण गतिविधियों में इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में निर्माण के दौरान विमान संचालन पर किसी तरह का असर न पड़े, इसका विशेष ध्यान रखना होगा। अध्ययन में जमीन की मजबूती, भूगर्भीय स्थिति, पानी की निकासी, बिजली और अन्य उपयोगिता सेवाओं की भूमिगत लाइनों की भी जांच की जाएगी। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि सुरंग बनने से ऊपर की सतह पर चलने वाले विमानों और भारी वाहनों की सुरक्षा पर कोई प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।

पहले भी सामने आती रही हैं सुरंग की योजनाएं
आईजीआई एयरपोर्ट और उसके आसपास यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पहले भी भूमिगत मार्गों की योजनाएं सामने आती रही हैं। आईजीआई और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए सुरंग की संभावना पर काम किया जा रहा है और इसके लिए अध्ययन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके अलावा द्वारका और एयरपोर्ट के बीच भूमिगत मार्ग तथा दिल्ली-गुरुग्राम और एयरपोर्ट के बीच बेहतर संपर्क के लिए भी अलग-अलग समय पर भूमिगत मार्गों की योजनाओं पर चर्चा हुई है। हालांकि, वर्तमान प्रस्ताव इन योजनाओं से अलग है। इसमें एयरपोर्ट के बाहर यातायात को जोड़ने के बजाय एयरपोर्ट के अंदर एयरसाइड क्षेत्र में सेवा वाहनों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए सुरंगों की संभावना तलाशने की तैयारी है।

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