शराब घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी की गिरफ्तारी से जमानत देने का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19 (1) के तहत मिली गिरफ्तारी की शक्ति जांच के उद्देश्य के लिए नहीं है। इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है, जब संबंधित अधिकारी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर लिखित में कारण दर्ज करने के बाद यह राय बनाने में सक्षम हो कि गिरफ्तार व्यक्ति दोषी है। यह कानूनी रूप से अनिवार्य है। गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के विश्वास योग्य कारण बताना भी कानूनी रूप से अनिवार्य है। पीठ ने कहा, गिरफ्तारी के लिए इंतजार किया जा सकता है और किया जाना चाहिए।
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह भी कहा, ईडी को एकरूपता से काम करना चाहिए। आचरण में एकरूपता रखनी चाहिए और गिरफ्तारी करने में सभी के लिए एक ही नियम का पालन करना चाहिए।
पीठ ने नोट किया कि 31 जनवरी, 2023 तक ईडी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 5,906 ईसीआईआर दर्ज किए गए। हालांकि, 4954 सर्च वारंट जारी करके 531 ईसीआईआर में तलाशी ली गई। पूर्व सांसदों, विधायकों और एमएलसी के खिलाफ दर्ज ईसीआईआर की कुल संख्या 176 थी। गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 513 है, जबकि दर्ज अभियोजन शिकायतों की संख्या 1,142 है। पीठ ने कहा, इन आंकड़ों से कई सवाल उठते हैं, जिसमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या ईडी ने कोई नीति बनाई है कि उन्हें पीएमएल अधिनियम के तहत किए गए अपराधों में शामिल व्यक्ति को कब गिरफ्तार करना चाहिए।
बड़ी पीठ को भेजे गए प्रश्न
क्या पीएमएलए की धारा 19 (1) के संदर्भ में पारित गिरफ्तारी के आदेश को चुनौती देने के लिए गिरफ्तारी की जरूरत एक अलग आधार है?
क्या गिरफ्तार करने की आवश्यकता किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने व हिरासत में लेने के औपचारिक मापदंडों की संतुष्टि को संदर्भित करती है या यह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की आवश्यकता के संबंध में अन्य व्यक्तिगत आधारों और कारणों से संबंधित है? यदि दोनों प्रश्न का उत्तर सकारात्मक है, तो गिरफ्तारी की जरूरत के प्रश्न की जांच करते समय कोर्ट की ओर से किन मापदंडों व तथ्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए?
इस मामले में सामग्री जुलाई, 2023 से पहले की
केजरीवाल के वकील ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी दलील में कहा था कि 21 मार्च, 2024 को उन्हें गिरफ्तार करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। मामले अगस्त, 2022 में दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, विश्वास करने योग्य कारणों में शामिल की गई अधिकतर सामग्री जुलाई, 2023 से पहले की है।
पीएमएल अधिनियम की धारा 50 और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी, राघव मगुंटा, सिद्धार्थ रेड्डी के बयान जुलाई, 2023 से पहले के हैं। इस प्रकार, उक्त सामग्री के आधार पर उन्हें मार्च में गिरफ्तार करना आवश्यक नहीं था।
पंकज बंसल मामले का दिया हवाला :
केजरीवाल के वकील ने पंकज बंसल मामले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि केवल असहयोग करने के कारण आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा, हम जानते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के सिद्धांत को अनियमितता या अवैधता को दोहराने या बढ़ाने के लिए लागू नहीं किया जा सकता। यदि कोई लाभ या सुविधा गलत तरीके से दी गई है, तो कोई अन्य व्यक्ति त्रुटि या गलती के कारण अधिकार के रूप में उसी लाभ का दावा नहीं कर सकता है।