देश के कुछ केंद्रशासित प्रदेशों समेत अन्य राज्यों में एक जुलाई से लागू होने वाले नए कानूनों को लेकर दिल्ली पुलिस ने खुद को पूरी तरह तैयार करना शुरू कर दिया है। सभी थाना पुलिस को नए कानूनों के तहत दर्ज होने वाली एफआईआर की डमी एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
हालांकि नई एफआईआर का ढांचा पुरानी एफआईआर की तरह है, सिर्फ दो बदलाव हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने और डमी सीजर की प्रैक्टिस करने को कहा गया है, ताकि जांच में काेई दिक्कत व कमी दिखती है तो वह पता लग सके। सभी थाना पुलिस को बृहस्पतिवार शाम तक नई एफआईआर की डमी एफआईआर भेज दी गई है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने दो दिन पहले पुलिस मुख्यालय में बुलाई बैठक में एक जुलाई से लागू होने वाले नए कानूनों को लेकर खुद को तैयार करने के आदेश दिए थे। उन्होंने अभी से डमी एफआईआर, डमी सीजर व वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने की जांच करना शुरू कर दिया है। साथ ही हर घटना की वीडियोग्राफी होना आवश्यक है। ऐसे में अभी से अपराध की डमी वीडियोग्राफी करना शुरू कर दिया जाए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी थाना पुलिस को डमी एफआईआर व डमी सीजर आदि बृहस्पतिवार शाम को भेज दी गई है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि अगर नए कानूनों के तहत जांच व एफआईआर करने में दिक्कत आती है तो वह बताई जाएं।
नए कानून 17 दिन बाद देश में लागू हो रहे हैं। हालांकि नई एफआईआर व पुरानी एफआईआर में कोई ज्यादा बदलाव नहीं है। एफआईआर के कॉलम नंबर दो में, एक्ट की में आईपीसी 1860 लिखा हुआ है, जबकि नई एफआईआर में दो नंबर कॉलम में भारतीय न्याय संहिता 23 लिखा हुआ है। इसके अलावा सेक्शन वाले कॉलम में कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं, इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराएं लगाई जाएंगी। इसके अलावा तीसरा भारतीय साक्ष्य संहिता है। इसके तहत बताया गया है कि कैसे साक्ष्य वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित करने हैं। पुलिस अपने सबूतों को कोर्ट में कैसे पेश करेगी आदि बताया गया है। हर घटना की वीडियोग्राफी जरूरी है।
कई अपराध को नए कानूनों में स्थान दिया गया
आतंकी व आतंकी वारदात के लिए बना कानून
पहले आतंकी वारदात के लिए कोई कानून नहीं था। पुलिस यूएपीए के तहत मामला दर्ज करती थी। अब नए कानूनों में आतंक व आतंकवादी वारदात के लिए अलग से धारा 113 बनाई गई है।
मॉब लिंचिंग
मॉब लिंचिंग के लिए पहले कोई कानून नहीं था। पुलिस हत्या की धारा में ही मामला दर्ज करती थी। अब मॉब लिंचिंग के लिए अलग से कानून बनाया गया है।
झपटमारी
झपटमारी के लिए कोई कानून नहीं था। पुलिस हल्की धाराओं में मामला दर्ज कर लेती थी। अब इसके लिए नया कानून बनाया गया है।
संगठित अपराध के लिए कानून बना
पहले संगठित अपराध यानि एकत्रित होकर अपराध करने के लिए कोई कानून नहीं था। अब संगठित अपराध के लिए नया कानून बनाया गया है।
महिला से जुडे़ अपराध को एक जगह एकत्रित किया
आईपीसी में महिलाओं से जुड़े अपराध जगह-जगह फैले हुए थे। अब नए कानूनों में महिला से जुड़े कानूनों को एक साथ रखा गया है। नए कानून जनता के लिए बहुत ही फायदेमंद रहेंगे। नए कानूनों के तहत जांच करने व साक्ष्य जुटाने आदेश आदि की दिल्ली पुलिस के जवानों को ट्रेनिंग दी जा रही है। पुलिस के करीब 20 हजार से ज्यादा जवानों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। मास्टर ट्रेनर अन्य पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं
-विजय सिंह, विशेष पुलिस आयुक्त, ट्रांसपोर्ट रेंज, नई दिल्ली